
सतना:बेटियों की उच्च शिक्षा और सुरक्षित आवास को लेकर सरकारें लगातार बड़े दावे कर रही हैं, लेकिन सतना में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाया गया शासकीय कन्या महाविद्यालय छात्रावास तीन साल बाद भी सिर्फ बंद भवन बनकर खड़ा है. हैरानी की बात यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने इस छात्रावास की जिम्मेदारी तक स्पष्ट नहीं हो पा रही है . पीडब्ल्यूडी ने इससे पल्ला झाड़ लिया, जबकि पीआईयू कार्यालय में भी अधिकारी स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके . ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सरकारी राशि से बना यह छात्रावास शुरू क्यों नहीं हो सका और इसकी जवाबदेही किसकी है.
जानकारी के अनुसार शासकीय कन्या महाविद्यालय परिसर में लगभग 1 करोड़ 34 लाख रुपये की लागत से 50 छात्राओं की क्षमता वाला बालिका छात्रावास निर्मित कराया गया था. वर्ष 2023 में भवन निर्माण का कार्य पूरा हो चुका था छात्रावास निर्माण का उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों से अध्ययन के लिए आने वाली छात्राओं को सुरक्षित एवं व्यवस्थित आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना था, ताकि उन्हें निजी किराये के कमरों या अन्य असुविधाजनक व्यवस्थाओं पर निर्भर न रहना पड़े लेकिन हकीकत यह है कि तीन साल बीत जाने के बाद भी छात्रावास शुरू नहीं हो पाया.
गौर तलब है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी छात्रावास प्रारंभ नहीं होने से अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगने लगे हैं. मामले की जानकारी लेने जब लोक निर्माण विभाग कार्यालय में संपर्क किया गया तो अधिकारियों ने कहा कि उक्त भवन उनके विभाग के अधीन नहीं आता और इसका संबंध परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू) से है. इसके बाद पीआईयू कार्यालय में जानकारी लेने पर वहां भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी. अधिकारियों का कहना था कि मामले की जानकारी जुटाकर बाद में बताया जाएगा कि छात्रावास का संचालन और नियंत्रण आखिर किस विभाग के अधीन है.
इस संदर्भ में जब पीआईयू उपयंत्री एस.के. द्विवेदी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस मामले की स्पष्ट जानकारी नहीं है तथा अभिलेख देखने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. वहीं कार्यपालन यंत्री पीआईयू रोहित कुमार ने कहा कि वे वर्तमान में मेडिकल अवकाश पर हैं और मामले की जानकारी उपलब्ध नहीं करा सकते.
स्थानीय लोगों के अनुसार इस छात्रावास के निर्माण को लेकर सतना के पूर्व विधायक स्वर्गीय शंकरलाल तिवारी ने विशेष प्रयास किए थे .बताया जाता है कि छात्राओं को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उन्होंने इस परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. हालांकि उनके निधन के बाद अब यह छात्रावास निर्माण पूर्ण होने के बावजूद उपयोग में नहीं आ रहा है
