नई दिल्ली | पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय इक्विटी बाजारों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यदि ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहा मौजूदा संघर्ष अगले कुछ हफ्तों में समाप्त हो जाता है, तो भारतीय कंपनियों की कमाई और घरेलू बाजारों पर इसका असर काफी सीमित रहेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालिया गिरावट के बाद निवेशकों के लिए जोखिम और रिटर्न का संतुलन पहले से बेहतर हुआ है, जिससे मौजूदा स्तर पर निवेश के अवसर अधिक आकर्षक हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति की सकारात्मक टिप्पणियों ने भी तनाव कम होने और ऊर्जा आपूर्ति स्थिर होने की उम्मीदें जगाई हैं, जिससे बाजार में स्थिरता लौटने के संकेत मिल रहे हैं।
भारत सरकार पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की सीमा को मौजूदा 20 प्रतिशत (E20) से बढ़ाकर 25-27 प्रतिशत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। अनाज एथेनॉल निर्माता संघ (GEMA) के अध्यक्ष सी.के. जैन ने स्पष्ट किया कि भारत की यह नीति किसी तात्कालिक युद्ध या संकट से प्रेरित नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करने का एक दीर्घकालिक लक्ष्य है। 1 अप्रैल से देश भर में E20 के पूर्ण रोलआउट के बाद अब फीडस्टॉक और अतिरिक्त अनाज की पर्याप्त उपलब्धता को देखते हुए इस लक्ष्य को और ऊपर ले जाने की 100 प्रतिशत संभावना है। यह कदम न केवल कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक झटकों से बचाने में सुरक्षा कवच का काम करेगा।
कोटक की रिपोर्ट और एथेनॉल क्षेत्र के विकास को जोड़कर देखें तो भारतीय अर्थव्यवस्था एक मजबूत स्थिति की ओर बढ़ रही है। कोटक के बेस केस परिदृश्य के मुताबिक, मौजूदा संघर्ष से वैश्विक तेल आपूर्ति ढांचे पर कोई दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा, जिससे आने वाले महीनों में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति सामान्य रहने की उम्मीद है। दूसरी ओर, एथेनॉल उत्पादन क्षमता में विस्तार और निवेशकों के बढ़ते उत्साह ने भारत को ऊर्जा सुरक्षा के मामले में एक चेकपॉइंट पार करने में मदद की है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू उत्पादन पर जोर और बाजार में सुधरते जोखिम-रिटर्न प्रोफाइल के कारण भारत पश्चिम एशिया के संकट के बावजूद अपनी विकास दर को बरकरार रखने में सफल रहेगा।

