नई दिल्ली | पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच भारतीय उद्योगों को बड़ी राहत देने के लिए केंद्र सरकार एक महत्वाकांक्षी कर्ज गारंटी योजना लाने की तैयारी कर रही है। वित्तीय सेवा विभाग द्वारा तैयार की जा रही इस योजना के तहत लगभग 2 से 2.5 लाख करोड़ रुपये की कर्ज गारंटी दी जा सकती है। यह पहल मुख्य रूप से उन कंपनियों और क्षेत्रों को लक्षित करेगी जो कच्चे माल की बढ़ती लागत, लॉजिस्टिक चुनौतियों और आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधानों के कारण नकदी के संकट से जूझ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, इस योजना का ढांचा कोविड-19 महामारी के दौरान सफल रही ‘ईसीएलजीएस’ योजना पर आधारित होगा, जिसकी आधिकारिक घोषणा अगले 15 दिनों के भीतर होने की संभावना है।
ईरान युद्ध के चलते सबसे ज्यादा दबाव सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) और निर्यात क्षेत्र पर देखा जा रहा है। बढ़ते समुद्री मालभाड़े और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर आवाजाही में रुकावट ने इन क्षेत्रों के लाभ मार्जिन को काफी कम कर दिया है। सरकार की इस नई योजना से छोटे उद्यमियों को बिना किसी अतिरिक्त कोलेटरल के बैंक से कर्ज मिल सकेगा, जिससे वे न केवल अपना कारोबार सुचारू रख पाएंगे, बल्कि अपने कर्मचारियों का वेतन भी समय पर दे सकेंगे। यह कदम अनिश्चित वैश्विक माहौल में उद्यमियों का मनोबल बढ़ाने और भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम करने के लिए एक रणनीतिक सुरक्षा कवच के रूप में देखा जा रहा है।
भू-राजनीतिक तनाव और यूक्रेन युद्ध जैसी चुनौतियों के बावजूद, भारत के निर्यात क्षेत्र ने अद्भुत जुझारूपन दिखाया है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के रुझान सकारात्मक बने हुए हैं और कई बाधाओं के बावजूद वस्तु निर्यात की रफ्तार थमी नहीं है। सरकार विभिन्न क्षेत्रों के साथ निरंतर संपर्क में है ताकि उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभाव का सटीक आकलन किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते 2.5 लाख करोड़ रुपये की इस लिक्विडिटी सहायता से भारतीय निर्यातक वैश्विक बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने में सक्षम होंगे और आपूर्ति श्रृंखला के झटकों को आसानी से झेल सकेंगे।

