कमर्शियल गैस की किल्लत और आसमान छूती कीमतों से देश का फूड सेक्टर बेहाल, रेस्टोरेंट्स ने घटाया स्टाफ और मेन्यू से गायब हुईं पकाने में समय लेने वाली डिशेज

नई दिल्ली | पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते भू-राजनैतिक तनाव का सीधा असर अब भारत की रसोई और फूड इंडस्ट्री पर दिखने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली सप्लाई चेन बाधित होने के कारण भारत में कमर्शियल एलपीजी की भारी किल्लत हो गई है। दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें 2,000 रुपये के पार निकल गई हैं, वहीं कालाबाजारी में यह 3,000 से 4,000 रुपये तक बिक रहा है। इस संकट के कारण दशकों पुराने रेस्टोरेंट्स और होटल अपने संचालन को रोकने पर मजबूर हैं। ईंधन की इनपुट कॉस्ट बढ़ने से छोटे वेंडर्स और स्ट्रीट फूड आउटलेट्स का प्रॉफिट मार्जिन पूरी तरह खत्म हो गया है, जिससे कई दुकानों पर ताले लटक गए हैं।

गैस की कमी और बढ़ती लागत से बचने के लिए रेस्टोरेंट मालिकों ने अब ‘सर्वाइवल मोड’ अपना लिया है। करोल बाग और सदर बाजार जैसे व्यापारिक केंद्रों में स्थित आउटलेट्स ने अपने मेन्यू से रवा डोसा, उत्तपम और विशेष चटनियों जैसी उन चीजों को हटा दिया है जिन्हें पकाने में अधिक समय और गैस खर्च होती है। केवल इतना ही नहीं, लागत घटाने के लिए बड़े पैमाने पर स्टाफ की छंटनी की जा रही है। कई संचालकों ने बताया कि जहां पहले 30 से 40 कर्मचारी काम करते थे, वहां अब केवल 10-12 लोगों से काम चलाया जा रहा है। कुक, हेल्पर और डिलीवरी बॉयज की नौकरियां जाने से इस सेक्टर से जुड़े लाखों परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

कमर्शियल गैस की कमी के कारण रेस्टोरेंट्स अब घरेलू सिलेंडरों का उपयोग करने को मजबूर हैं, जिससे घरेलू स्तर पर भी आपूर्ति प्रभावित हो रही है। आम ग्राहकों के लिए बाहर खाना खाना 20 से 30 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के अनुसार, रोज की कमाई पर निर्भर रहने वाले लगभग 60 फीसदी फेरीवाले काम बंद कर चुके हैं। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और स्टेकहोल्डर्स ने केंद्र सरकार से मांग की है कि कमर्शियल गैस की कीमतों में तुरंत राहत दी जाए और छोटे फूड बिजनेस को बचाने के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की जाए। यदि जल्द ही सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो फूड सर्विस सेक्टर में बड़े पैमाने पर बिजनेस बंद होने की चेतावनी दी गई है।

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