
सागर। शासकीय स्वशासी कन्या स्नातकोत्तर उत्कृष्टता महाविद्यालय के नृत्य विभाग में व्याख्यान माला कार्यक्रम के अंतर्गत विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। नृत्य विभाग अध्यक्ष डॉ.अपर्णा चाचोंदिया ने मंचासीन अतिथियों का स्वागत किया एवं व्याख्या माला के औचित्य पर प्रकाश डाला। विषय विशेषज्ञ डॉ. राकेश सोनी सहायक प्राध्यापक ललित कला एवं प्रदर्शनकारी कला विभाग, डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर ने कहा कि रस स्वतः ही उत्पन्न नहीं होता बल्कि कलाकार के क्रियाकलापों के फलस्वरुप सहृदय प्रेक्षक में रस की उत्पत्ति होती है। नृत्य विभाग की छात्राओं की पूर्वरंग, एकादश नाट्य संग्रह दस रूपक, नाट्यधर्मी- लोक धर्मी आदि नाट्यशास्त्रीय विषयों से संबंधित जिज्ञासा का भी समाधान किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के संगीत विभाग से पधारे गायन के सहायक प्राध्यापक डॉ. अवधेश तोमर ने भी नृत्य कला के ताल पक्ष एवं भाव पक्ष पर अपने विचार साझा करते हुए मार्कंडेय और वज्र संवाद की कथा द्वारा सभी कलाओं के अंतर्संबंध बतलाए। डॉ प्रेम चतुर्वेदी ने गायन, वादन, नृत्य तीनों के समन्वय को संगीत बताते हुए नाट्य कला और संगीत के संबंधों की प्रगाढ़ता स्पष्ट की। व्याख्यान कार्यक्रम का संचालन नृत्य विभाग की छात्रा अमिता चौरसिया ने किया एवं आभार यामिनी चढ़ार ने व्यक्त किया।इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार से डॉ. निशा इंद्र गुरु, डॉ. हरिओम सोनी एवं श्रीमती क्रांति लोधी उपस्थित रहे।
