विनिर्माण क्षेत्र की रफ्तार मार्च में पौने चार साल के निचले स्तर पर

मुंबई, 02 अप्रैल (वार्ता) लागत मूल्य में तेज वृद्धि, कमजोर मांग और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनैतिक अस्थिरता के कारण मार्च में देश की विनिर्माण गतिविधियों में सुस्ती देखी गयी और विनिर्माण क्षेत्र का एचएसबीसी इंडिया खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) पौने चार साल के निचले स्तर पर आ गया।
मार्च में पीएमआई 53.9 दर्ज किया गया जो मासिक आधार पर गतिविधियों में वृद्धि तो दिखाता है लेकिन वृद्धि की रफ्तार जून 2022 के बाद सबसे कम है। फरवरी में पीएमआई 56.9 रहा था।

सूचकांक का 50 से ऊपर रहना गतिविधियों में तेजी और इससे कम रहना गिरावट को दिखाता है जबकि 50 का स्तर स्थिरता बताता है। पीएमआई के आंकड़े गतिविधियों की मासिक आधार पर तुलना करते हैं। इसके आंकलन में उत्पादन के अलावा लागत, नये ऑर्डर, उत्पाद मूल्य, रोजगार सृजन आदि को भी शामिल किया जाता है। भारत में एचएसबीसी के मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर हो रहा है जिससे भारतीय विनिर्माता भी प्रभावित हो रहे हैं। उत्पादन और नये ऑर्डरों में उल्लेखनीय सुस्ती दर्ज की गयी है जो मांग में कमी और बढ़ी हुई अनिश्चितता की ओर इशारा करता है।

उन्होंने कहा कि इस दौरान एल्युमीनियम, रसायन और ईंधन समेत अधिकतर कच्चे माल की कीमतों में उछाल आया है। फिलहाल कंपनियां बढ़ी लागत का ज्यादातर बोझ खुद उठाते दिख रहे हैं जिससे उत्पादों की कीमत तुलनात्मक रूप से उतनी नहीं बढ़ी है। एसएंडपी ग्लोबल द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि पीएमआई के दो सबसे बड़े घटकों नये ऑर्डर और उत्पादन की वृद्धि दर मार्च में साल 2022 के मध्य के बाद से सबसे कम स्तर पर रहा है। इसकी मुख्य वजह बाजार की परिस्थितियां, लागत का दबाव और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध हैं। लागत मूल्य में साढ़े तीन साल की सबसे तेज वृद्धि रही। अल्यूमीनियम, रसायन, ईंधन, जूट, चमड़ा, कपड़ा, तेल, रबड़ और स्टील कुछ प्रमुख सामान हैं जिनकी कीमत में तेज वृद्धि देखी जा रही है। हालांकि कंपनियों ने लागत मूल्य की तुलना में उत्पादों के दाम कम बढ़ाये हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अनिश्चितता को देखते हुए कंपनियों ने कच्चे माल का भंडार बढ़ा लिया है।

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