नई दिल्ली | भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे रंगीन और चहेते खिलाड़ियों में से एक सलीम दुर्रानी की आज पुण्यतिथि है। 11 दिसंबर 1934 को अफगानिस्तान के खैबर दर्रे में जन्मे दुर्रानी का परिवार बाद में जामनगर, भारत में बस गया था। उनके पिता अब्दुल अजीज भी एक पेशेवर क्रिकेटर थे। 1947 के विभाजन के दौरान उनके पिता पाकिस्तान चले गए, लेकिन सलीम ने भारत में ही रहकर तिरंगे का मान बढ़ाने का फैसला किया। बाएं हाथ के इस शानदार बल्लेबाज और स्पिन गेंदबाज ने 1960 में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया और अपनी आक्रामक बल्लेबाजी व सटीक गेंदबाजी से जल्द ही दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बना ली।
सलीम दुर्रानी अपनी एक खास खूबी के लिए मशहूर थे—वे दर्शकों की मांग पर छक्का जड़ने का दम रखते थे। 1961-62 में इंग्लैंड के खिलाफ भारत की ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत में वे सबसे बड़े नायक बनकर उभरे, जहां उन्होंने कोलकाता और चेन्नई टेस्ट में कुल 18 विकेट चटकाए थे। इतना ही नहीं, वेस्टइंडीज की धरती पर भारत की पहली जीत में भी उनकी भूमिका निर्णायक रही, जब उन्होंने महान गैरी सोबर्स और क्लाइव लॉयड के विकेट लेकर कैरेबियाई टीम की कमर तोड़ दी थी। उनके इसी अद्भुत योगदान के कारण उन्हें 1961 में क्रिकेट जगत का पहला ‘अर्जुन पुरस्कार’ दिया गया था।
अपने करियर में 29 टेस्ट खेलने वाले दुर्रानी ने 1202 रन बनाने के साथ-साथ 75 विकेट भी अपने नाम किए। खेल के अलावा उन्होंने बॉलीवुड फिल्म ‘चरित्र’ में भी काम किया, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है। साल 2011 में उन्हें बीसीसीआई द्वारा प्रतिष्ठित ‘सी.के. नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया था। 2 अप्रैल 2023 को 88 वर्ष की आयु में कैंसर से जूझते हुए इस महान क्रिकेटर ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। आज उनकी पुण्यतिथि पर पूरा खेल जगत उन्हें एक ऐसे योद्धा के रूप में याद कर रहा है, जिसने सरहदों की दीवार लांघकर भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयां दीं।

