अटलांटा, इंग्लैंड को सेमीफाइनल में 2-1 से हराकर विश्व कप फाइनल में पहुंचने वाली अर्जेंटीना की फुटबॉल टीम अब एक गंभीर विवाद में फंस गई है। मैच के बाद खिलाड़ियों द्वारा मैदान पर ‘फॉकलैंड द्वीप अर्जेंटीना का है’ लिखा बैनर लहराना फीफा के नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है। इस राजनीतिक संदेश के प्रदर्शन के बाद फीफा अब टीम के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है, जिससे फाइनल से पहले टीम की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
ऐतिहासिक विवाद और अर्जेंटीना का दावा
फॉकलैंड द्वीप को लेकर ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच दशकों से विवाद चल रहा है, जिसे लेकर 1982 में दोनों देशों के बीच युद्ध भी हुआ था। अर्जेंटीना की उपराष्ट्रपति विक्टोरिया विलारुएल द्वारा इस विवादास्पद बयान और बैनर का समर्थन करने से मामला और गरमा गया है। हालांकि, फीफा के कड़े नियमों के अनुसार खेल के दौरान राजनीतिक नारेबाजी या संदेशों का प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित है, और इसी कारण अर्जेंटीना के खिलाड़ियों का यह कदम अब कड़ी जांच के घेरे में है।
फीफा की संभावित कार्रवाई का साया
यह पहली बार नहीं है जब अर्जेंटीना को इस मुद्दे पर फीफा की नाराजगी झेलनी पड़ी है; 2014 में भी समान बैनर दिखाने पर उन पर जुर्माना लगाया गया था। अब अर्जेंटीना को 20 जुलाई को फाइनल में स्पेन का सामना करना है, लेकिन इस विवाद ने टीम की तैयारियों पर असर डाल दिया है। क्या फीफा उन पर जुर्माना लगाएगा या खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगेगा, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। फिलहाल अर्जेंटीना टीम का ध्यान फाइनल पर है, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई की तलवार उन पर लटकी हुई है।

