रंगदूत समेत 1100 से अधिक कला मंडलियों का अनुदान बंद

सीधी। रंगदूत समेत देश की 1100 से अधिक कला मंडलियों का अनुदान बंद कर दिया गया। रंगदूत सीधी ही नहीं बल्कि देश का एक प्रमुख और सक्रिय नाट्य दल है, जिसने देश के साथ विदेशों में भी सीधी का परचम लहराया है। रंगदूत से प्रशिक्षित कलाकार रंगमंच और सिनेमा तक विंध्य का नाम रोशन कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 तक गुरु-शिष्य परम्परा योजना के अंतर्गत रंगदूत को केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा अनुदान मिलता रहा है।

अचानक सत्र 2025-26 की समाप्ति के समय मंत्रालय द्वारा जारी मिनट्स में बीते सत्र 2024-25 एवं 2025-26 के अनुदान हेतु रंगदूत द्वारा भेजे गए आवेदन को बिना कोई कारण बताए निरस्त दिया गया है। ऐसा देशभर की करीब 70 प्रतिशत से अधिक सक्रिय संस्थाओं के साथ हुआ है जो कि मंत्रालय द्वारा स्कीम के अंतर्गत चाही गई अहर्ताएं पूरी करती हैं। इस संबंध में जिले के रंगकर्मी प्रसन्न सोनी ने बताया कि इस वर्ष निर्णायक समिति में विभिन्न कला विधाओं के विषय-विशेषज्ञ जो कि अलग-अलग राज्यों का प्रतिनिधित्व करते थे, उन्हें नहीं रखा गया। साथ ही पूर्व के वर्षों में अनुदान का आवेदन करने वाली संस्थाओं के गुरुओं/प्रतिनिधियों को विशेषज्ञों के समक्ष भौतिक रूप से प्रस्तुत होना अनिवार्य था। इस प्रक्रिया में अनुदान की पात्रता सिर्फ कागज़ आधारित न होकर सीधे भौतिक सत्यापन से स्वत: जुड़ जाती थी जिसे इस वर्ष संस्कृति मंत्रालय ने नहीं अपनाया और सीधे ऑनलाइन आवेदनों पर एक तरफा विचार किया। ऐसा करना एक पारदर्शी और तार्किक प्रक्रिया के स्थान पर अपारदर्शी और अतार्किक प्रक्रिया को वरीयता देने जैसा कदम है। संस्कृति मंत्रालय द्वारा भेजे गए प्रतिनिधि द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में ही रंगदूत का भौतिक सत्यापन किया गया और अनुदान जारी रखने हेतु पात्र भी पाया गया, किन्तु इसी सत्र के लिए संस्था के रिनुअल आवेदन को कमेटी द्वारा रिजेक्ट कर दिया गया। यहां मंत्रालय द्वारा अपने ही बनाये नियमों का अतिक्रमण किया गया। इस चयन समिति ने संस्कृति मंत्रालय के अपने ही बनाये नियमों, मापदंडों एवं आधारों को दरकिनार करते हुए निर्णय लिए हैं। इस बार सुदूर क्षेत्रों में यदि एक या दो समूह ही सक्रिय थे तो उनका भी अनुदान बंद कर दिया गया है। जैसे सीधी सिंगरौली मिलाकर दो ही संस्थाएं को कला विकास हेतु अनुदान प्राप्त था जिसमें से एक प्रमुख रंगदूत का बंद कर दिया गया। रंगदूत को प्रतिष्ठित रंंग अशोक राष्ट्रीय नाट्य समारोह हेतु प्रतिवर्ष मिलने वाला अनुदान भी बिना कोई कारण बताए रिजेक्ट किया गया है। ज्ञात हो कि रंग अशोक सीधी जिले में रंगमंच के जनक स्व.अशोक तिवारी की स्मृति में आयोजित होता था। इस तरह से यह सीधी की रंग विरासत को अपमानित करने जैसा कदम है। रंगमंच से बच्चों को बड़ी संख्या के व्यक्तित्व विकास और बेहतर नागरिक बनने का मार्ग प्रशस्त होता है साथ ही अनेक संस्थाएं कैदियों, किन्नरों, बौनों, पीडि़त महिलाओं के साथ कला के माध्यम से चेतना विस्तार और राष्ट्र निर्माण का कार्य करती हैं। रिजेक्ट हुई सभी संस्थाओं ने औसतन अपने 10 वर्षों की सक्रियता से कम से कम 6 करोड़ से अधिक वयस्कों और बच्चों को प्रभावित किया है।

उप मुख्यमंत्री से मिलकर रंगकर्मियों ने बताई समस्या

इस मुद्दे पर उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल से मध्यप्रदेश के कलाकारों ने 31 मार्च 2026 को भोपाल स्थित उनके कार्यालय में मुलाकात की और उन्हें इस विषय से अवगत कराया। उप मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय को पत्र लिखकर चर्चा करने का आश्वासन दिया है।

Next Post

पुलिस और प्रशासन की संयुक्त जुगलबंदी, जिले में सुशासन और सुरक्षा के लिए मास्टर प्लान तैयार

Wed Apr 1 , 2026
सीधी । जिले की कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ एवं अभेद्य बनाने तथा विकास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से कलेक्टर विकास मिश्रा एवं पुलिस अधीक्षक संतोष कोरी की संयुक्त अध्यक्षता में पुलिस अधीक्षक कार्यालय स्थित सभागार में उच्च स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक […]

You May Like