भागीरथपुरा के 18 मृतकों का पोस्टमार्टम क्यों नहीं किया? दो का ही क्यों..?

इंदौर:शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में जहरीले पानी से करीब 20 लोगों की मौत हो गई. इतनी संख्या में मौत होने पर प्रशासन ने सिर्फ दो लोगों का ही पोस्टमार्टम किया है, बाकी 18 लोगों की मौत का कारण पता लगाना उचित नहीं समझा! उक्त मामले में स्थानीय प्रशासन की गंभीर चूक सामने नजर आ रही है. स्थानीय प्रशासन की चूक का खामियाजा कहीं पूरे शहर को नहीं भुगतना पड़ जाए!

भागीरथपुरा क्षेत्र में जहरीले और दूषित पानी पीने से 20 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोगों बीमार पड़ गए और अभी भी बीमार हो रहे हैं. इतने गंभीर मामले में स्थानीय प्रशासन ने असंवेदनशीलता का प्रमाण दिया है. भागीरथपुरा के 20 मृतकों में से सिर्फ 2 लोगों का ही पोस्टमार्टम किया गया है. ध्यान रहे कि किसी भी घटना दुर्घटना या महामारी के दौरान मृत्यु का कारण पता करने या लगाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जाती है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए शरीर में से विसरा और ऑर्जेनिज्म कल्चर से बॉडी में किस बैक्टेरिया या जीवाणु की घातक उपस्थिति है, मालूम पड़ जाती है. यही कारण है पोस्टमार्टम रिपोर्ट को पुलिस और अन्य चिकित्सा मामले में महत्वपूर्ण माना जाता है. भागीरथपुरा में दूषित और जहरीला पानी से मौत के मामले को स्थानीय प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया.

हादसे में मृतकों की मृत्यु का गहराई से बीमारी या जीवाणु का शरीर में पता लगाने के लिए हर मृतक पोस्टमार्टम करना आवश्यक था. स्थानीय प्रशासन ने सिर्फ दो लोगों का पोस्टमार्टम कर इतिश्री कर ली और 18 मृतकों का पोस्टमार्टम नहीं करवाया. इससे समझा जा सकता है कि प्रशासन के जिम्मेदार भागीरथपुरा क्षेत्र में संक्रमित बीमारी को लेकर कितने जिम्मेदारी से कार्रवाई कर रहे हैं. उक्त मामले में कलेक्टर शिवम वर्मा को कॉल किया, लेकिन उन्होंने शायद व्यस्तता के कारण कॉल रिसीव नहीं किया.
केवल दो का पोस्टमार्टमः घनघोरिया
एमवाय के अधीक्षक डॉ घनघोरिया ने बताया कि भागीरथपुरा क्षेत्र के 20 मौतों में से सिर्फ दो लोगों का पोस्टमार्टम किया गया है. 18 लोगों का पोस्टमार्टम नहीं किया गया है.
एक्सपर्ट कहते हैं कि पोस्टमार्टम जरूरी है…
सेवानिवृत्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एस.के. पोरवाल ने बताया कि पोस्टमार्टम संदिग्ध अवस्था में मौत होने पर किया जाता है, इससे कारण पता चलता है कि शरीर में कौन से जीवाणु या हानिकारक तत्व मौजूद थे. पोस्टमार्टम में विसरा और ऑर्जेनिज्म कल्चर होने से मृत्यु का स्पष्ट कारण मालूम पड़ जाता है. पोस्टमार्टम और मृतकों का भी होना चाहिए था

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