नई दिल्ली | देश में करीब 15 साल के लंबे इंतजार के बाद आज 1 अप्रैल 2026 से ‘जनगणना-2027’ के पहले चरण की औपचारिक शुरुआत हो गई है। कोरोना महामारी और अन्य तकनीकी कारणों से हुई देरी के बाद, अब यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल रूप में आयोजित की जा रही है। पहले चरण में ‘मकान सूचीकरण और आवास गणना’ (HLO) का कार्य 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त के अनुसार, इस बार नागरिकों को 16 भाषाओं में ‘ऑनलाइन स्व-गणना’ (Self-Enumeration) की सुविधा भी दी गई है, जिससे लोग घर बैठे अपनी जानकारी सरकारी पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगे।
इस बार की जनगणना में प्रगणक (Enumerators) घर-घर जाकर कुल 33 महत्वपूर्ण सवाल पूछेंगे। इनमें मकान की स्थिति, कमरों की संख्या, पीने के पानी का स्रोत, शौचालय की उपलब्धता, बिजली और रसोई के ईंधन (LPG/PNG) जैसी बुनियादी सुविधाओं की जानकारी ली जाएगी। इसके अलावा, डिजिटल उपकरणों जैसे स्मार्टफोन, इंटरनेट, लैपटॉप और वाहनों के स्वामित्व पर भी डेटा जुटाया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार जातिगत जनगणना को भी शामिल किया गया है, जिसके आंकड़े दूसरे चरण में विस्तार से एकत्रित किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य 2027 तक अंतिम रिपोर्ट जारी करना है।
जनगणना प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे यह भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना बन गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों द्वारा साझा किया गया व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए होगा। जो नागरिक खुद जानकारी भरना चाहते हैं, वे आधिकारिक पोर्टल पर मोबाइल नंबर से रजिस्टर कर 16 अंकों की यूनिक ‘स्व-गणना आईडी’ प्राप्त कर सकते हैं। यह आधुनिक तरीका न केवल समय की बचत करेगा, बल्कि देश के भविष्य की योजनाओं के लिए सटीक और पारदर्शी आंकड़े भी प्रदान करेगा।

