ग्रे से ग्रीन अमोनिया : भारत ने 10 साल के लिए तय की ग्रीन अमोनिया की सप्लाई, 21,000 करोड़ विदेशी मुद्रा की होगी बचत

नयी दिल्ली, 31 मार्च (वार्ता) देश को उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में केंद्र सरकार ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक ‘ग्रीन अमोनिया’ समझौता किया है, जिसके तहत देश की 13 बड़ी फर्टिलाइज़र कंपनियों को अगले 10 वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय बाजार से करीब आधी कीमत पर ग्रीन अमोनिया की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गयी। इसमें कहा गया है कि नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत उर्वरक क्षेत्र के लिए ग्रीन अमोनिया समझौतों (कुल 11 प्रोजेक्ट) का आदान-प्रदान केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी और विद्युत व नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद येस्सू नायक की मौजूदगी में किया गया।

इस समझौते से न केवल खाद की कीमतों में वैश्विक अस्थिरता का खतरा खत्म होगा, बल्कि आयात पर निर्भरता कम होने से देश के लगभग 2.5 बिलियन डॉलर 21,000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी। उर्वरक कंपनियों और ग्रीन अमोनिया बनाने वाली कंपनियों के बीच ग्रीन अमोनिया खरीदने और ग्रीन अमोनिया सप्लाई करने के लिए इस समझौते से स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण कार्बन कम करने की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है।

इस समझौते की खास बात यह है कि नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत कुल 11 प्रोजेक्ट्स के लिए खरीद और आपूर्ति समझौतों का आदान-प्रदान किया गया। जहाँ वैश्विक बाजार में अमोनिया की कीमत लगभग 110 रुपये /किलो है, वहीं इस समझौते में भारत ने घरेलू स्तर पर 49.75 से 64.74 रूपये /किलो की बेहद प्रतिस्पर्धी दरें हासिल की हैं।

इसके अलावा 10 साल की ‘निश्चित दाम’ व्यवस्था के कारण अब अंतरराष्ट्रीय युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय किसानों को मिलने वाली खाद की कीमतों पर नहीं पड़ेगा। साथ ही खेतों में ‘ग्रे’ अमोनिया (जीवाश्म ईंधन आधारित) की जगह ‘ग्रीन’ अमोनिया का उपयोग खेती के कार्बन फुटप्रिंट को कम कर ‘नेट जीरो’ के लक्ष्य में मदद करेगा।

गौरतलब है कि सरकार 19,744 करोड़ रूपये के बजट के साथ इस मिशन को लागू कर रही है, जिसका लक्ष्य 2030 तक सालाना 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन करना है।

इस मौके पर श्री नड्डा ने कहा, “ग्रीन अमोनिया एग्रीमेंट का यह आदान-प्रदान सस्टेनेबल फर्टिलाइज़र प्रोडक्शन की दिशा में भारत की यात्रा में एक ऐतिहासिक कदम है। ग्रीन अमोनिया को अपनी सप्लाई चेन में शामिल करके हम न सिर्फ़ कार्बन उत्सर्जन कम कर रहे हैं, बल्कि देश की लंबे समय की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता भी मजबूत कर रहे हैं।”

 

 

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