महिला उद्यमी 6सिग्मा क्वालिटी प्रणाली का मंत्र अपनायें: वैष्णव

नयी दिल्ली, 30 मार्च (वार्ता) रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उद्योग संभाल रही महिलाओं को अपने संगठन और आपूर्ति श्रृंखला में गुणवत्ता की संस्कृति पर ध्यान केंद्रित करते हुए 6सिग्मा ( 99.9997 प्रतिशत शुद्धता) की संस्कृति अपनाने का आह्वान किया है।

श्री वैष्णव यहां भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) के महिला प्रभाग फिक्की लेडीज़ ऑर्गनाइज़ेशन (फिक्की- एफएलओ) के 42वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन को केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी संबोधित किया। इस सम्मेलन में फिक्की- एफएलओ ने उद्यमशीलता विकास, कौशल प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता, नेतृत्व विकास और आम जन की रोज़ी-रोटी से जुड़े क्षेत्रों में कार्य के जरिए शहरी और ग्रामीण भारत में अपनी बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। दो दिन के सम्मेलन में उद्योग, मीडिया, राजनीति और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी जानी-मानी महिला हस्तियां शामिल हुईं।

उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि महिला उद्यमी कंपनियों के सामाजिक दायित्व के कार्यों (सीएसआर) और कौशल विकास से ऊपर उठ कर नयी वास्तविकताओं का सामना करे और अपने संगठन में 6सिग्मा गुणवत्ता प्रणाली को अपना मंत्र बनायें। उन्होंने कहा कि उद्यमियों को कच्चा माल और सेवाएं देने वाले अपने आपूर्तिकर्ताओं के साथ मिल कर इस संस्कृति को बढ़ाना होगा क्यों कि यह केवल लागत ही नहीं गुणवत्ता और नवाचार अस्तित्व का प्रश्न बन गया है। उन्होंने कहा कि आज प्रतिस्पर्धा उन देशों से है जिन्होंने गुणवत्ता, नवाचार तथा लागत दक्षता की अपनी संस्कृति से लम्बे समय से अपनी पहचान बनायी है।

उन्होंने कहा, “ भारत आज सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्पेस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे कुछ सबसे एडवांस्ड सेक्टर में तेज़ी से बढ़ रहा है। यह बदलाव पूरे देश में उद्योगों और मौकों को नया आकार दे रहा है।” उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में अकेले इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में, भारत ने पिछले दशक में छह गुना वृद्धि की है, जिसमें निर्यात आठ गुना बढ़ा है। भारत से मोबाइल हैंडसेट का निर्यात इस दौरान लगभग 27 गुना बढ़ा है। इस सेक्टर के कार्यबल में लगभग 60-70 महिलाएं हैं। यह महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की सच्ची भावना को दिखाता है।

श्री वैष्णव ने कहा, “ भारत आज चार लाख करोड़ डालर की अर्थव्यवस्था है और उससे बढ़ रहा है। आगे क्वालिटी, नवचार और कार्य की दक्षता विश्व में हमारी प्रतिस्पर्धा क्षमता को तय करेंगी। मैं ‘फिक्की एफएलाओ’ जैसे संगठनों से आग्रह करता हूं कि वे सुगठित प्रणाली और एआई अपनाने में पहल करें, खासकर एप्लिकेशन लेवल पर, ताकि इंडस्ट्रीज़ में सार्थक बदलाव लाया जा सके और राष्ट्र-निर्माण में योगदान दिया जा सके।”

श्री शेखावत ने फिक्की एफएलओ की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूनम शर्मा और उनके सहयोगी पदाधिकारियों को उनके नेतृत्व और प्रतिबद्धता के लिए बधाई दी। उन्होंने देश में महिलाओं के लिए अवसरों का सृजन, उनकी क्षमता और उनमें नेतृत्व की योग्यता के विस्तार को विकसित भारत के प्रयासों की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने इस दिशा में संगठन के काम की तरीफ की।

फिक्की एफएलओ अध्यक्ष पूनम शर्मा ने कहा, “ 2025-26 फिक्की-एफएलओ के लिए एक अहम साल रहा है। इस दौरान समवेशन की दिशा में बड़े पैमाने पर कार्य हुए जिसको मापा जा सकता है। संगठन पूरे भारत में 16 लाख से ज़्यादा महिलाओं के साथ सम्पर्क करने में सफल हुआ जो उद्यमिता को संभव बनाने, कौशल पैदा करने और रोज़गार के मजबूत अवसर बनाने के हमारे मिलकर किये गये प्रयासों की ताकत को दिखाता है।” उन्होंने कहा कि संगठन की – एफएलओ-कवच पहल से लेकर ज़मीनी स्तर पर कौशल विकास और उद्यमशीलता के लिए लोगों की सहायता की जा रही है।

सम्मेलन में संगठन ने सेवा क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के सुझावों पर केंद्रित रिपोर्ट ‘लैंगिक विविधीकरण और काम-धाम चुनने के अवसर में अंतर’ नाम की एक रिपोर्ट भी पेश की। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का सेवा क्षेत्र एक अहम मोड़ पर है, जो तेज़ी से विकास के लिए तैयार है, फिर भी इसमें महिलाओं की भागीदारी कम होने की वजह से इसकी वृद्धि में रुकावटें हैं। भारत के कुल 64.3 करोड़ कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी 40.3 प्रतिशत है, जो एक बहुत बड़े अनछुए मौके को दिखाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सेवा क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 55 प्रतिशत योगदान करता है, पर नौकरी के अवसर के मामले में इसका योगदान लगभग 30 प्रतिशत है। स्वास्थ्य, शिक्षा आदि क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ी हुई भागीदारी इस क्षेत्र को नयी गति दे सकती है।

 

 

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