नयी दिल्ली, 29 मार्च (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील की है कि वे जनभागीदारी की भावना से अपनी प्राचीन पांडुलिपियों को ‘ज्ञान भारतम सर्वे’ में साझा करें, ताकि महान भारतीय संस्कृति और समृद्ध विरासत को संरक्षित किया जा सके।श्री मोदी ने आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 132वीं कड़ी में रविवार को देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा, “आज मैं ‘मन की बात’ में एक ऐसे प्रयास के बारे में बताना चाहता हूं, जो देशवासियों की जनभागीदारी की भावना को दर्शाता है। ये प्रयास है ‘ज्ञान भारतम सर्वे’ और इसका संबंध हमारी महान संस्कृति और समृद्ध विरासत से है। इसका उद्देश्य देशभर में मौजूद पांडुलिपियों के बारे में जानकारी जमा करना है।”
प्रधानमंत्री ने देशवासियों को इस सर्वेक्षण से जुड़ने का आग्रह करते हुए बताया कि इस सर्वे से जुड़ने का लोगों के लिए एक सरल माध्यम ज्ञान भारतम ऐप है। उन्होंने कहा, “आपके पास अगर कोई पांडुलिपि है या उसके बारे में जानकारी है, तो उसकी फोटो ‘ज्ञान भारतम ऐप’ पर जरूर साझा करें। हर एंट्री से जुड़ी जानकारी को दर्ज करने से पहले उसकी पुष्टि भी की जा रही है।”
श्री मोदी ने खुशी जताते हुए कहा कि अब तक इस ऐप के जरिए तथा अन्य तरीकों से हजारों पांडुलिपियां लोगों ने साझा की हैं। उनका कहना था कि लोग लगातार इस सर्वे से जुड़ रहे हैं। इसके कुछ उदाहरण देते हुए उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के नामसाई के चाओ नंतिसिन्ध लोकांग का जिक्र किया और कहा कि उन्होंने ताई लिपि में पांडुलिपियां साझा की हैं। अमृतसर के भाई अमित सिंह राणा ने गुरुमुखी लिपि में पांडुलिपि शेयर की है, जो हमारी महान सिख परंपरा और पंजाबी भाषा से जुड़ी है। कुछ संस्थाओं ने ताड़ के पत्तों पर लिखी पांडुलिपियां दी हैं। राजस्थान के अभय जैन ग्रंथालय ने तांबे की प्लेटों पर लिखी बहुत पुरानी पांडुलिपियां साझा की हैं। वहीं, लद्दाख की हमिस मठ ने तिब्बती भाषा में बहुमूल्य पांडुलिपियों की जानकारी दी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सर्वे जून के मध्य तक जारी रहेगा। उन्होंने सभी देशवासियों से आग्रह किया कि सभी लोग अपनी संस्कृति से जुड़े और देश की ज्ञान की खजाने में पांडुलिपियों के रूप में मौजूद इन पहलुओं को सामने लाएं और इसे ज्ञान भारतम ऐप पर साझा करें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘ज्ञान भारतम नेशनल मैनुस्क्रिप्ट सर्वे’ संस्कृति मंत्रालय द्वारा 16 मार्च से शुरू किया गया जो लगभग तीन महीने चलेगा। देश में अनुमानित एक करोड़ से अधिक प्राचीन पांडुलिपियां मौजूद हैं, जिन्हें मैप करने, दस्तावेजीकरण करने और अंत में डिजिटल रिपॉजिटरी में सुरक्षित रखने का यह पहला बड़ा राष्ट्रव्यापी अभियान है। पांडुलिपि मालिकों का मालिकाना हक पूरी तरह सुरक्षित रहेगा, केवल जानकारी साझा करनी है। इसमें ज्ञान भारतम ऐप के अलावा ज्ञानभारत वेबसाइट पर भी योगदान दिया जा सकता है।
