ईरान युद्ध में अब तक हज़ारों लोग हताहत, लाखों विस्थापित

तेहरान, 29 मार्च (वार्ता) अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण बीते एक माह में जान माल का बेहिसाब नुकसान हुआ है, लेकिन इस संघर्ष का अंत कहीं नजर नहीं आ रहा है। दोनों देश अपने-अपने संघर्षविराम मसौदे पेश कर चुके हैं लेकिन अब तक आम सहमति नहीं बन सकी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बीते एक माह में ईरान में मृतकों की संख्या 1,900 से अधिक हो गयी है। लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई के कारण 1,100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जिनमें 121 बच्चे शामिल हैं। इज़रायल पर हुए हमलों में करीब 20 लोगों की जान गयी, जबकि खाड़ी क्षेत्र में लगभग 25 लोगों के मारे जाने की खबर है। अरब देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान के हमलों में कई सैनिक हताहत हुए हैं, जिनमें कम से कम छह सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है। लेबनान में 12 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। ईरान में करीब 10,000 नागरिक ठिकानों को नुकसान पहुंचा है। यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ जब अमेरिका और इज़रायल ने तेहरान सहित ईरान के कई शहरों पर बड़े पैमाने पर हमले किए, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मौत हुई। इसी दिन ईरान के होर्मोज़गान प्रांत के मिनाब शहर का एक बालिका विद्यालय भी अमेरिकी मिसाइल का निशाना बना, जिसमें 165 लोगों की मौत हुई। मृतकों में ज्यादातर 7-12 वर्ष की छात्राएं थीं, हालांकि अमेरिका ने इस हमले की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया और कहा कि घटना की जांच हो रही है।

अमेरिका-इजरायल ने आयतुल्ला खामेनेई की हत्या को ‘पूर्ववर्ती हमला’ करार दिया। इसके जवाब में ईरान ने अपनी पू्र्व की चेतावनियों पर अमल किया और इज़रायल के साथ-साथ खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल एवं ड्रोन हमले किए। इसके साथ ही ईरान ने होर्मुज जलडमरुमध्य को भी बंद कर दिया, जहां से पूरी दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुज़रता है। युद्ध के शुरुआती दिनों में ही हिजबुल्लाह भी संघर्ष में शामिल हो गया, जिसके बाद इज़रायल ने लेबनान में जमीनी कार्रवाई शुरू की। इस दौरान खाड़ी देशों ने हमलों की निंदा की, जबकि अमेरिका ने कहा कि उसका लक्ष्य ईरान की सैन्य क्षमता को नष्ट करना है। युद्ध के दूसरे सप्ताह तक यह स्पष्ट हो गया कि ईरानी शासन ध्वस्त नहीं हुआ है और युद्ध लंबा खिंच सकता है। तीसरे सप्ताह में संघर्ष और तेज हुआ, जब इज़रायल ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों, विशेषकर साउथ पार्स गैसफील्ड पर हमला किया। इस हमले के बाद धधकती आग के कारण कई किलोमीटर दूर तक काले बादल छा गये और आसपास के इलाकों में काली बारिश भी हुई। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया। इस दौरान इज़रायल ने सुरक्षा सचिव अली लारिजानी और बासिज प्रमुख ग़ुलामरज़ा सुलेमानी सहित ईरान के कई शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों की हत्या की। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका की सैन्य क्षमता पर हमला जारी रखा। अमेरिकी सेना की केन्द्रीय कमान के अनुसार, वह ईरान में 11000 से ज्यादा सैन्य लक्ष्यों पर हमला कर चुका है और उसे करीब 3500 ठिकानों पर हमला करना बाकी है। उधर, होर्मुज जलडमरुमध्य बंद होने के कारण तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गयी हैं और वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है।
चौथे सप्ताह में अमेरिका ने संकेत दिया कि वह कूटनीतिक समाधान की तलाश में है और ईरान को युद्धविराम का प्रस्ताव भेजा। राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्वीट किया कि ईरान के साथ उनकी अच्छी बातचीत हुई है, जिसके कारण उन्होंने ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर नियोजित फैसलों को टालने का फैसला किया है।
दूसरी ओर ईरान ने किसी भी तरह की बातचीत के इनकार कर दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने कूटनीतिक समाधान की इच्छा जाहिर की जिसे ईरान ने खारिज कर दिया।

अमेरिका ने क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक तैनात किए है और संभावित जमीनी कार्रवाई के संकेत दिए, जबकि इज़रायल ने हमले जारी रखे। कतर और अन्य देशों ने कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया, लेकिन दोनों पक्षों के बीच अविश्वास बना रहा। युद्ध के आर्थिक नुकसान पर नजर डालें तो कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई और कीमतें 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गयीं। अमेरिका से लेकर एशिया तक शेयर बाजार धड़ाम हुए। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ी और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव देखा गया। इस बीच, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर गालिबाफ ने युद्ध के 30 दिन पूरे होने पर कहा है कि दुश्मन सबके सामने बातचीत का संकेत देता है, जबकि गुपचुप तरीके से वह ज़मीनी हमले की साज़िश रच रहा है। ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी इरना की ओर से प्रकाशित संदेश में श्री गालिबाफ ने कहा, “अमेरिका 15-बिंदुओं की एक सूची के साथ, अपनी इच्छाएं ज़ाहिर कर रहा है और उन चीज़ों को पाने की कोशिश कर रहा है जिन्हें वह युद्ध में हासिल करने में नाकाम रहा।” उन्होंने कहा कि ईरानी सेनाएं अमेरिकी सैनिकों के ज़मीन पर उतरने का इंतज़ार कर रही हैं, ताकि वे उन पर आग बरसा सकें। उन्होंने आत्मसमर्पण को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ईरान अपमान नहीं सहेगा।

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