घटना के 8 दिन बाद भी आईपी एड्रेस ट्रेस नहीं कर पाई सतना पुलिस


सतना: जिला न्यायालय परिसर सतना को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने की घटना को आठ दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इस गंभीर मामले में अब तक पुलिस के हाथ खाली हैं। साइबर सेल और पुलिस टीम द्वारा संयुक्त रूप से जांच शुरू किए जाने के बावजूद अभी तक कोई ठोस सुराग सामने नहीं आया है और न ही इस साजिश में शामिल किसी आरोपी की गिरफ्तारी हो सकी है।

बीते 20 मार्च की सुबह करीब 5 बजकर 34 मिनट पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सतना की आधिकारिक मेल आईडी पर एक धमकी भरा ई-मेल प्राप्त हुआ था। यह मेल तमिल भाषा में लिखा गया था, जबकि उसका विषय हिंदी में था। ई-मेल में दावा किया गया था कि जिला न्यायालय परिसर में 15 स्थानों पर जहरीले बम लगाए गए हैं, जो दोपहर 1 बजे विस्फोट करेंगे। यह सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन में हडक़ंप मच गया था और तत्काल डॉग स्क्वाड, बम निरोधक दस्ता और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गया था।

घंटों तक चले सघन तलाशी अभियान के बावजूद न्यायालय परिसर में कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। मामले की गंभीरता को देखते हुए मैहर और अमरपाटन स्थित तहसील न्यायालयों में भी जांच की गई, लेकिन वहां भी कुछ संदिग्ध नहीं मिला। इसके बाद साइबर सेल और पुलिस टीम ने ई-मेल की तकनीकी जांच शुरू की, जिसमें प्रारंभिक तौर पर तमिलनाडु से कनेक्शन सामने आया।
पासपोर्ट ऑफिस को भी मिल चुकी है धमकी
कोर्ट परिसर के आलावा इसी गुरुवार को भोपाल सतना के पासपोर्ट कार्यालय को उड़ाने की धमकी दी गई थी।  जिसके बाद सतना की सिटी कोतवाली पुलिस एहतियातन डॉग स्कावड के जयस्तंभ चौक स्थित कार्यालय पहुंची थी, लेकिन एक बार फिर यह धमकी महज एक अफवाह ही निकली।
साइनाइड युक्त 6 आरडीएक्स बमों से धमाके का था दावा
ई-मेल में साइनाइड युक्त छह आरडीएक्स बमों से धमाका करने का दावा किया गया था और अंत में नक्सली तथा आईएसआई-डीएमके जैसे संदिग्ध शब्दों का उल्लेख भी किया गया था। इसी बीच भोपाल के पासपोर्ट कार्यालय को भी बम से उड़ाने की धमकी मिलने की खबर ने मामले को और गंभीर बना दिया है। गौरतलब है कि रीवा के बाद महज 71 दिनों के अंतराल में यह दूसरा मामला सामने आया है, जिसमें सतना, मैहर और बड़वानी के न्यायालयों को निशाना बनाने की धमकी दी गई थी।
तो मतलब सतना पुलिस के रडार से बाहर है पकड़ 
इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि घटना के इतने दिन बाद भी पुलिस अधिकारियों द्वारा कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की जा रही है। जिला पुलिस के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं और लगातार संपर्क के प्रयासों के बावजूद प्रतिक्रिया देने से बचते नजर आ रहे हैं। पुलिस की इस कार्यशैली से आमजन में असंतोष बढ़ता जा रहा है। लोगों का मानना है कि इतने संवेदनशील मामले में तेजी से कार्रवाई और पारदर्शिता जरूरी है, लेकिन वर्तमान स्थिति यह संकेत दे रही है कि जांच में कोई खास प्रगति नहीं हो पाई है। ऐसे में अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या इस मामले की जांच राज्य स्तर की एजेंसियों को सौंप दी जानी चाहिए।

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