
जबलपुर। घर में सामने रहने वाला युवक के द्वारा बेटी को जबरदस्ती बंधक बनाकर ले जाने के आरोप लगाते हुए पीड़ित पिता ने हाईकोर्ट के बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई के दौरान पुलिस की तरफ से पेश की गयी स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया कि दोनों ने आर्य समाज मंदिर से विवाह कर लिया है। महिला साढे आठ माह की गर्भवती है,जिसके कारण यात्रा में उसके लिये जोखिम पूर्ण थी। पुलिस के द्वारा महिला के बयान की पेन ड्राइव हाईकोर्ट में पेश की गयी। महिला ने अपने बयान में कहा गया था कि बच्चे को जन्म देने के बाद वह अपने पैतृक घर जायेगी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने महिला के बयान को रिकॉर्ड में लेते हुए याचिका का निराकरण कर दिया।
सतना निवासी पिता की तरफ से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में कहा गया था कि उसकी 22 वर्षीय बेटी 18 मार्च 2025 से लापता है। उसके लापता होने के दूसरे दिन गुमशुदगी कर रिपोर्ट थाने में दर्ज करवाई गई थी। घर के सामने रहने वाला युवक भी लापता है। याचिका में आरोप लगाते हुए कहा गया था कि घर के सामने रहने वाला युवक उसकी बेटी को जबरदस्ती उसकी बेटी को अपने साथ लेकर गया है। पुलिस द्वारा 9 माह का समय गुजर जाने के बावजूद भी बेटी की तलाश नहीं कर पाने के कारण उक्त बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गयी है।
हाईकोर्ट ने दिसम्बर 2025 में याचिका की सुनवाई करते हुए लापता युवती को पेश करने के आदेश जारी किये थे। पुलिस के द्वारा पिछली सुनवाई के दौरान स्टेटस रिपोर्ट दायर करने समय प्रदान करने की राहत चाही गयी थी। पुलिस द्वारा पेश की गयी स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया कि दोनो ने रोहिणी दिल्ली स्थित आर्य समाज मंदिर में 20 मार्च 2025 को विवाह कर लिया था। पुलिस के द्वारा विवाह का सर्टिफिकेट भी पेश किया गया। पुलिस ने द्वारा मेडिकल रिपोर्ट पेष करते हुए बताया गया कि महिला के साढे आठ माह की गर्भवती है,जिसके कारण यात्रा करना जोखिम पूर्ण है। पुलिस के द्वारा पेन ड्राइव में रिकॉर्ड महिला के बयान को हाईकोर्ट में पेश किया गया। युगलपीठ पुलिस की तरफ से पेश किये गये बयान की रिकॉर्डिंग सुनने के बाद याचिका का निराकरण कर दिया।
