
बालाघाट।अग्रणी जिला प्रबंधक एवं जिला जेल अधीक्षक के मार्गदर्शन में 10 अक्टूबर को जिला जेल बालाघाट में 10 दिवसीय मशरूम कल्टीवेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम का औपचारिक समापन किया गया। यह कार्यक्रम सेंट ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान बालाघाट और मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य दंडित एवं विचाराधीन बंदियों को रिहाई के बाद स्वरोजगार से जोड़ना रहा।
प्रशिक्षण में जिला जेल के 25 बंदियों ने भाग लिया। इस दौरान उन्हें मशरूम की खेती की बारीकियों से अवगत कराया गया, जिसमें खेती की तकनीक, उत्पादन प्रक्रिया और बाजारीकरण पर विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा, बैंकिंग सेवाओं की जानकारी, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का परिचय तथा उद्यमी बनने के आवश्यक गुणों पर भी विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कार्यक्रम के समन्वयक अंकित लिल्हारे ने पूरे प्रशिक्षण का कुशलतापूर्वक प्रबंधन किया।
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर जिला जेल अधीक्षक आरएल सहलाम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं आजीविका मिशन की जिला परियोजना प्रबंधक सुश्री स्वेता मेहतो, कार्यक्रम समन्वयक अंकित लिल्हारे, जिला प्रबंधक (स्किल) दिलीप सिंह तथा मुकेश गोखे ने भी शिरकत की। इस अवसर पर प्रशिक्षण प्राप्त बंदियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए, जो उनके भविष्य के स्वरोजगार प्रयासों में सहायक सिद्ध होंगे।
प्रशिक्षण के दौरान डोमेन स्किल ट्रेनर के रूप में सत्येंद्र कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने मशरूम खेती की व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक बारीकियां सिखाईं, जिससे प्रतिभागी आत्मविश्वास से भरपूर हो गए।
जिला जेल अधीक्षक सहलाम ने समापन संबोधन में कहा कि यह प्रशिक्षण बंदियों के पुनर्वास का एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटने में सक्षम बनाएगा। यह पहल न केवल बंदियों के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में मशरूम उत्पादन को प्रोत्साहित करने में भी योगदान देगी।
