
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने एमएससी नर्सिंग (द्वितीय वर्ष) की परीक्षा परिणाम में गड़बड़ी के मामले को सख्ती से लिया है। जस्टिस विवेक रूसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने मामले में एमपी मेडिकल यूनिवर्सिटी जबलपुर के कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक को अगली सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने उक्त अधिकारियों को यह स्पष्ट करने को कहा है कि विश्वविद्यालय में किस पद्धति से मूल्यांकन किया जा जाता है। न्यायालय ने डिजिटल मूल्यांकन एजेंसी के जिम्मेदार अधिकारी को भी तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को निर्धारित की है।
दरअसल यह मामला जबलपुर निवासी प्रेमलता तिवारी की ओर से दायर किया गया है। जिसमें आरोप है कि मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर के परीक्षा परिणामों में बड़ी गड़बड़ी हुई है। एमएससी नर्सिंग (द्वितीय वर्ष) की परीक्षा में मेधावी छात्रों को शून्य या असाधारण रूप से कम अंक दिए गए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंकित सक्सेना एवं रितिक शर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता की उत्तर पुस्तिका में परीक्षक द्वारा उत्तरों को सही मार्क किया गया है, लेकिन इसके बावजूद डिजिटल सिस्टम में उन्हें शून्य अंक प्रदान किए गए हैं। विश्वविद्यालय ने अपने बचाव में तर्क दिया कि उनकी डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली फुल प्रूफ है और इसमें मानवीय हस्तक्षेप संभव नहीं है। मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये।
