दहशत में रहतीं है गर्ल्स होस्टल की छात्राएं, जिम्मेदारों ने फेरा मुहं

ग्वालियर। तानसेन रोड स्थित शासकीय अध्यापक शिक्षा महाविद्यालय परिसर में संचालित गर्ल्स हॉस्टल जो कि नाम का हॉस्टल है, अंदर से यह कबाड़खाने की तरह हो गया है। इस हॉस्टल में हजारों किलोमीट दूर से पढ़ाई करने आई छात्राएं रहतीं है। नवभारत संवाददाता ने हॉस्टल की पड़ताल करने पर देखा कि यहां लगीं पानी की टंकियां जिनमे बर्षों से सफाई नही हुई, काई लगी हुई है, पानी मे कीड़े पड़ गए है, हॉस्टल के अंदर सभी जगह गंदगी फैली हुई है। रोज यहां झाड़ू भी नहीं लगाई जाती। ऐसे में इन बच्चियों को बीमारी का खतरा बना रहता है। इसी इमारत में एक मेस भी बना हुआ है जो कभी खोला ही नहीं गया उसमें रखा सामान कबाड़ा हो गया है

*हॉस्टल में सिर्फ नाम के लिए है महिला वार्डन*

हॉस्टल में रह रही छात्राओं ने बताया कि हम हर माह 1 हजार रु.फीस देते है उसके बावजूद हम बिजली ठीक करवाना, नल की टोंटी बदलवाना जैसे काम अपने निजी पैसों से करवाते है। हमारे प्रिंसीपल कभी यहां नहीं आते हैं। दो महिला वार्डन है। भारती पुजारी (होस्टल वार्डन), श्यामा दुबे (सहायक-हॉस्टल वार्डन) के पद पर है, सिर्फ फीस के लिए यहां आती है। बाकी हमारी परेशानियां सुनने बाला कोई नहीं है

*प्रिंसीपल और वार्डन उलझे, एक दूसरे पर लगाये आरोप*

नवभारत संवाददाता जब प्रिंसीपल आदर्श पंडित के ऑफिस में पहुँचे तो प्रिंसीपल ने वार्डन भारती पुजारी को बुलाकर कहा कि हॉस्टल का चार्ज हमनें इन्हें रिटन में दे दिया है। एक बार हॉस्टल की खिड़की का कांच बदलवाया गया तो वार्डन ने उसे पैसे नहीं दिए एवं वार्डन हमसे कहतीं हैं कि में हॉस्टल का कोई भी काम नहीं करूंगी वहीं वॉर्डन भारती पुजारी का कहना है कि मुझे वार्डन पद के आदेश मिले है पर अभी तक चार्ज गीता सिसोदिया के पास है मुझे चार्ज नहीं सौपा गया। आरोप है कि हॉस्टल के कुछ रूमों में गीता सिसोदिया ने अपने पर्सलन ताले डाल रखे है ।

इनका कहना है…

बच्चों ने मुझे बिजली बंद होने का नहीं बताया। अगर मुझे कोई बताता, बिजली ठीक करवा देता। यह हॉस्टल शिक्षा विभाग के अंडर आता है, इसलिए इसके मेंटिनेंस का पैसा नहीं आता। यहां का क्षेत्र जंगल जैसा है इसलिए यहां सांप जैसे जीव जंतु घूमते ही रहते है

आदर्श पंडित

प्रिंसीपल, शा.अ.शि. महाविद्यालय तानसेन रोड

 

में यहां हॉस्टल प्रभारी हूँ, वार्डन नहीं हूँ, गर्ल्स हॉस्टल में बच्चियों की देख रेख के लिए वार्डन को 24 घंटे रहना चाहिए जो कि यहां नहीं है। बच्चियों के द्वारा कुछ महीनों से दी गई फीस मेरे पास है। उन्हें रखने के लिए कोई लॉकर या अलमारी नहीं है तो डर लगता है कि चूहे उन्हें कुतर ना जाएं, बाकी फीस का हिसाब गीता सिसौदिया के पास है जो उन्होंने मुझे नहीं दिया है

भारती पुजारी

हॉस्टल वार्डन

 

इस विद्यालय के प्रिंसीपल मुझसे अभद्र व्यवहार करते थे मेने न्यायालय में उनके खिलाफ केस कर दिया था और ये न्ययालय में दोषी पाए गए और इन पर न्यायालय द्वारा 50 हजार रुपए मुझे देने का जुर्माना भी लगाया गया है। परिवार न्यायालय ने मुझे 3 महीने का रेट स्वीकृत किया था। मैं 3 माह बाद आई हूँ। वार्डन का चार्ज मेरे पास है, जो लेना चाहें, वह ले सकता है मैं देने को तैयार हूँ

गीता सिसौदिया

टीचर- शा.अ.शि. महाविद्यालय

 

कुछ दिनों पहले जब गर्मी अपने चरम पर थी मुझे पता चला कि इस गर्ल्स हॉस्टल में 6 दिनों से बिजली नहीं है बिजली के कारण पानी भी नहीं आ रहा था तो मैंने तुरंत बिजली ठीक करवाई और इस हॉस्टल में साफ सफाई के लिए आज निगम की टीम बुलाई है

 

किरण धर्मेंद्र वर्मा

क्षेत्रीय पार्षद वार्ड- 17

 

छात्राओं ने सुनाई अपनी पीड़ा

इस हॉस्टल में बहुत गंदगी है अभी कुछ दिन पहले 6 दिन तक हम बिना लाइट के रहे है। 1 हजार रूपए फीस देने के बाद भी हमें यहां कोई सुविधा नहीं है। इतने बदतर हालात हमनें कहीं नहीं देखे, अगर हम कोई शिकायत करें तो हमें यहां का स्टाफ डांटता है।

रक्षा पटले-छात्रा

बालाघाट

हॉस्टल की खिड़की दरवाजे के कांच टूटे होने से बारिश के समय यहां अंदर बड़े बड़े सांप आ जाते है हम दहशत के कारण रातों को सो नहीं पाते। हॉस्टल में मेस तो है पर कभी खुला नहीं हम विद्यालय परिसर के बाहर ही खाना लेकर खाते है

सीमा उइके-छात्रा

सिवनी

बारिश होने से हॉस्टल के अंदर रूमों में पानी भर जाता था। इसके लिए हम पर्सनल अपने निजी पैसों से सीमेंट खरीद कर लाये और छत पर डालने के लिए त्रिपाल भी लाये थे। हम यह आबाज प्रदेश के मंत्रियों तक उठाएंगे जिससे यहां के हालात सुधर जाएं। हम तो अपनी पढ़ाई करके चले जायेंगे पर इस हॉस्टल में आने बाली बाली अपनी बहनों के लिए अच्छे इंतजाम करके जायँगे

श्रद्धा वरखे-छात्रा

छिंदवाड़ा

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