
जबलपुर। इलाज के नाम पर स्मार्ट सिटी अस्पताल के डॉक्टरों ने इलाज के नाम पर ने इंश्योरेंस क्लेम के चक्कर में हमारे पैर काट जीवन भर के लिए अपाहिज बना दिया गया। यह शिकायत रमखिरिया निवासी बसंती मल्लाह और दलपतपुर निवासी सकुन बाई मल्लाह ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर की और न्याय की गुहार लगाई।
शिकायत में पीडि़ताओं ने बताया कि वे मोटरसाइकिल से जा रहे थे, तभी ट्रक क्रमांक एमपी 21 जेड डी 9367 के चालक ने तेज गति और लापरवाही से चलाते हुए पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीनों सडक़ पर जा गिरे। दुर्घटना के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। घायलों को 108 एम्बुलेंस के माध्यम से श्रीधाम अस्पताल से जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था।
एम्बुलेंस को जबरन रोक ले गए स्मार्ट सिटी अस्पताल-
शिकायत में बताया कि जब उन्हें रेफर कर दिया गया था तभी रास्ते में कुछ अज्ञात तत्वों ने एम्बुलेंस को जबरन रोका, चालक के साथ मारपीट की और घायलों को डरा-धमकाकर जबरदस्ती स्मार्ट सिटी हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया। पीडि़तों को प्रलोभन दिया गया कि वहाँ उनका इलाज मुफ्त में होगा।
उंगलियां चल रही थी, लापरवाही से बड़ा संक्रमण-
पीडि़त महिला का आरोप है कि जब वे अस्पताल पहुँचे, तब उनके पैर की उंगलियां चल रही थीं। लेकिन स्मार्ट सिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने इलाज के नाम पर पैर पर प्लास्टर चढ़ाकर उसे पन्नी (प्लास्टिक) से ढंक दिया। कई दिनों तक उचित देखरेख न होने के कारण पैर अंदर ही अंदर गल गया और उससे बदबू आने लगी। संक्रमण इतना फैल गया कि डॉक्टरों ने इंश्योरेंस क्लेम के चक्कर में बसंती का पैर काट दिया, जिससे वह अब जीवन भर के लिए दिव्यांग हो गई हैं।
मेडिकल फाइल देने से किया इनकार-
पीडि़त परिवार ने जब इलाज से संबंधित फाइल (मेडिकल रिकॉर्ड) मांगी, तो अस्पताल प्रबंधन ने फाइल देने से साफ इनकार कर दिया। प्रबंधन का कहना है कि इलाज हो गया है, अब फाइल नहीं मिलेगी। यह सीधे तौर पर मरीज के अधिकारों का उल्लंघन है। पीडि़तों ने दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
