पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और डीएमके के बीच गठबंधन पर बनी अंतिम सहमति, कांग्रेस 16 और डीएमके 12 सीटों पर लड़ेगी चुनाव, नामांकन के आखिरी दिन सुलझा विवाद

पुडुचेरी/नई दिल्ली | केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस और डीएमके के बीच जारी गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। नामांकन के अंतिम दिन दोनों दलों ने गठबंधन के नए फॉर्मूले पर मुहर लगा दी, जिसके तहत कुल 30 सीटों में से कांग्रेस 16 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी, जबकि डीएमके को 12 सीटें दी गई हैं। शेष दो सीटों में से सीपीआई और वीसीके को एक-एक सीट आवंटित की गई है। शुरुआत में डीएमके ने 14-14 सीटों के बराबर बंटवारे की मांग रखी थी, लेकिन कांग्रेस ने खुद को क्षेत्र की मुख्य पार्टी बताते हुए अधिक सीटों पर दावा ठोंका था। लंबी बातचीत और शीर्ष नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद दोनों दल इस समझौते पर राजी हुए।

गठबंधन की आधिकारिक घोषणा के साथ ही चुनावी बिसात बिछ गई है। कांग्रेस ने थट्टनचावडी सीट से मौजूदा मुख्यमंत्री एन. रंगासामी के खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान सांसद वी. वैथिलिंगम को मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी को इस बार टिकट नहीं मिल सका है, क्योंकि उनकी दावेदारी वाली नेल्लीथोपे सीट पर डीएमके के साथ पेंच फंसा हुआ था। पुडुचेरी के एआईसीसी प्रभारी गिरीश चोडनकर ने विश्वास जताया है कि यह गठबंधन एकजुट होकर चुनाव लड़ेगा। 26 मार्च को नामांकन वापसी की अंतिम तिथि के बाद ही सीटों की वास्तविक और स्पष्ट तस्वीर सामने आ पाएगी।

पुडुचेरी का यह समझौता पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में हुए गठबंधन की तर्ज पर ही किया गया है। तमिलनाडु में भी कड़ी सौदेबाजी के बाद डीएमके ने कांग्रेस को 234 में से 28 सीटें दी हैं। कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि सीटों की संख्या पर भले ही थोड़ा समझौता करना पड़ा हो, लेकिन गठबंधन का बचना भाजपा और एनडीए को सत्ता से बाहर करने के लिए आवश्यक था। गठबंधन के नेताओं ने दावा किया है कि पुडुचेरी की जनता वर्तमान एनडीए सरकार से त्रस्त है और इस बार बदलाव के लिए वोट करेगी। भाजपा की विचारधारा को तमिलनाडु और पुडुचेरी के लिए अनुपयुक्त बताते हुए कांग्रेस ने जीत का पूर्ण भरोसा जताया है।

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