जबलपुर:सर्वोच्च न्यायालय ने मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के संबंधित दायर एसएलपी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट वापस भेजते हुए सुनवाई के निर्देश दिये थे। ओबीसी आरक्षण के पक्ष तथा विपक्ष में दायर याचिका की सुनवाई हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ के द्वारा की गयी। याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं को निर्देशित किया है कि याचिका संबंधित दस्तावेज 15 अप्रैल के पूर्व हाईकोर्ट दायर करें। याचिका पर अगली सुनवाई 2 अप्रैल को निर्धारित की गयी है।
गौरतलब है कि प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किये जाने के पक्ष तथा विपक्ष में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कुछ याचिकाओं की सुनवाई करते हुए ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने पर रोक लगा दी थी। विपक्ष में दायर याचिका में कहा गया था कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इंदिरा साहनी तथा मराठा आरक्षण के संबंध में दायर याचिकाओं में स्पष्ट कहा गया है कि आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होने चाहिये। कुछ याचिकाओं में याचिकाओं में फार्मूला 87ः13 को चुनौती देते हुए 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर आपत्ति की गयी थी। पक्ष में दायर की गयी याचिकाओं में आबादी के अनुपात में आरक्षण की मांग की गयी थी।
याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस संबंध में दायर सभी एसएलपी को सुनवाई के लिए हाईकोर्ट वापस भेज दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश जारी किये है कि प्रकरणों की सुनवाई के लिए विशेष बेंच का गठन करते हुए तीन माह में उसका निराकरण किया जाये। जिसमें से दो माह का समय गुजर गया है। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए सभी पक्षकारों के अधिवक्ता को निर्देशित किया है कि प्रकरण के संबंधित सभी दस्तावेज 15 अप्रैल से पूर्व दायर करें। युगलपीठ ने रजिस्ट्री को निर्देशित किया की ओबीसी आरक्षण के समस्त मामले की संयुक्त सुनवाई 2 अप्रैल को लिस्ट की जाये। आरक्षण के विरोध में दायर याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी तथा प्रदेश सरकार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह तथा हस्ताक्षेपकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता वरुण ठाकुर ने पैरवी की।
