बिना टैक्सी परमिट की गाड़ी विभागों में है अटैच

सरकार को लग रहा चूना, क्या पुलिस कर पाएगी अधिकारियों की गाडिय़ों पर चालानी कार्यवाही, परिवहन विभाग भी मौन

 

शाजापुर, 21 फरवरी. शाजापुर के शत-प्रतिशत शासकीय कार्यालयों में जो वाहन अटैच किए गए हैं. उनमें से अधिकांश वाहन बिना टैक्सी परमिट के ही लगे हुए हैं. परिवहन विभाग इस मामले पर पूरी तरह मौन है. यदि आम वाहन हो या किसी आम जनता का वाहन हो, तो परिवहन विभाग तत्काल कार्यवाही करता है, लेकिन जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के पास अटैच लग्जरी वाहन बिना टैक्सी परमिट के संचालित हो रहे हैं. जो सरकार को लाखों का चूना लगा रहे हैं.

गौरतलब है कि शाजापुर के अधिकांश विभागों में निजी वाहनों को अटैच किया गया है. शासन के नियमानुसार निजी वाहनों को अटैच करने के पहले संबंधित वाहन का टैक्सी परमिट अनिवार्य है, लेकिन शाजापुर में राजस्व विभाग हो या पुलिस विभाग हो, जो वाहन अटैच किए गए हैं, उनमें से अधिकांश टैक्सी परमिट नहीं है. जिससे शासन को तो राजस्व हानि हो ही रही है और जो अधिकारी नियम-कानून का लोगों से पालन कराते हैं, वे खुद सरकार के नियम को तोडक़र लग्जरी गाडिय़ों में सायरन के साथ सरकार के दिशा-निर्देशों को धता बता रहे हैं. कुछ विभागों में ही टैक्सी परमिट अटैच वाहनों का पालन किया जा रहा है, लेकिन अधिकांश विभागों में तो टैक्सी परमिट के बिना ही वाहन संचालित हो रहे हैं.

 

कैसे हो रहा है बिलों का भुगतान…?

 

आश्चर्य की बात तो यह है कि छोटे-छोटे बिलों के भुगतान पर बारीकी से जांच होती है, लेकिन जब बड़े अधिकारियों के अटैच वाहन का भुगतान हो रहा है, तो किसी ने आज तक इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया कि अटैच वाहन टैक्सी परमिट है या नहीं. सभी सरकारी विभागों में लगे अधिकांश वाहनों पर टैक्सी परमिट ना होने के कारण शासन को जो राजस्व हानि हो रही है, वो अलग, लेकिन आश्चर्य की बात तो यह है कि परिवहन विभाग भी इस मामले पर मौन है.

 

क्या पुलिस लगा पाएगी बिना टैक्सी परमिट गाडिय़ों के संचालन पर रोक…

 

आम आदमी यदि सीट बेल्ट ना लगाए, हेलमेट ना पहने, कोई वाहन यदि किराये से चला रहा है और उसका टैक्सी परमिट ना हो, तो यातायात पुलिस उसे तत्काल चालानी कार्यवाही कर देती है, लेकिन क्या यातायात पुलिस खुद के विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के यहां अटैच वाहनों पर चालानी कार्यवाही करने की हिम्मत जुटा पाएगी, जिनके वाहन बिना टैक्सी परमिट और बिना पीली पट्टी के संचालित हो रहे हैं. नियम तो सभी के लिए समान हैं. चाहे वो सरकारी अधिकारी हो, कर्मचारी हो या आम आदमी हो. लेकिन यहां खुलेआम सरकारी विभागों में अटैच वाहन व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहे हैं. क्योंकि उसमें अधिकारी बैठते हैं और किसकी मजाल जो उनके वाहनों पर चालानी कार्यवाही करे.

 

आबकारी विभाग से लेकर पुलिस विभाग में भी बिना टैक्सी परमिट के वाहन अटैच

 

शाजापुर तहसीलदार, एसडीएम और एडीएम के वाहन को यदि छोड़ दिया जाए, तो अधिकांश विभागों में जो वाहन अटैच किए गए हैं, वे बिना टैक्सी परमिट और बिना पीली पट्टी लगी नंबर प्लेट के साथ खुलेआम सडक़ों पर दौड़ रहे हैं. जिला आबकारी विभाग में जो वाहन अटैच है, वो भी बिना पीली पट्टी और टैक्सी परमिट के बिना ही संचालित हो रहा है. तो यही हाल पुलिस विभाग का भी है. लेकिन परिवहन विभाग इन वाहनों को देखकर भी धृतराष्ट्र बना हुआ है.

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