अमेरिका युद्ध के अगले चरण पर विचार कर रहा है, ईरान के साथ कूटनीतिक संपर्क की भी संभावना

वॉशिंगटन, 22 मार्च (वार्ता) ट्रंप प्रशासन ने इस पर प्रारंभिक चर्चा शुरू कर दी है कि पश्चिम एशिया संघर्ष का अगला चरण क्या हो सकता है। इसके साथ ही ईरान के साथ संभावित कूटनीतिक आदान-प्रदान पर भी विचार किया जा रहा है, हालांकि अधिकारियों ने आगाह किया है कि कूटनीति के लिए गुंजाइश बहुत कम है, क्योंकि अगले कई हफ्तों तक लड़ाई जारी रहने और यहां तक कि और तेज होने की आशंका है।

एक्सियोस ने ह्वाइट हाउस के करीबी सूत्रों के हवाले से बताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा था कि वह संघर्ष को समेटने पर विचार कर रहे हैं, हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया कि वे अभी दो-तीन सप्ताह और सैन्य अभियानों की उम्मीद कर रहे हैं। इसके समानांतर सलाहकारों ने बातचीत के लिए जमीन तैयार करना शुरू कर दिया है, ताकि यदि कोई अवसर मिले तो उसका लाभ उठाया जा सके।

पर्दे के पीछे काम करते हुए विशेष दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ पहले से ही तेहरान के अधिकारियों के साथ कूटनीतिक संपर्क की शुरुआती योजना बनाने में जुटे हैं।

अधिकारियों ने कहा है कि ईरान के साथ किसी भी समझौते के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खुलवाना, इस्लामिक गणराज्य के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के विशाल भंडार का समाधान करना और उसके परमाणु व मिसाइल कार्यक्रमों के साथ-साथ क्षेत्रीय प्रॉक्सी मिलिशिया और आतंकी समूहों के समर्थन पर दीर्घकालिक सीमाएं तय करना आवश्यक होगा।

युद्ध शुरू होने के बाद से दोनों पक्षों के बीच संवाद बहुत कम रहा है। हाल के दिनों में अमेरिका-ईरान के बीच सभी कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह से टूटते नजर आए हैं, क्योंकि इजरायल ने कई शीर्ष अधिकारियों को खत्म कर दिया था। इससे देश में पहले से मौजूद नेतृत्व के अभाव की स्थिति और भी गंभीर हो गयी है।

खबरों के मुताबिक हालांकि मिस्र, कतर और ब्रिटेन जैसे मध्यस्थों ने दोनों पक्षों के बीच संदेश पहुंचाये हैं। काहिरा और दोहा के अधिकारियों ने ईरान के साथ संभावित कूटनीतिक संपर्क की ओर इशारा किया है। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, हालांकि उसकी शर्तें काफी सख्त हैं।

ईरान की कथित मांगों में तत्काल युद्धविराम, भविष्य में किसी भी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ गारंटी और मुआवजे की मांग शामिल है। एक अमेरिकी अधिकारी ने हर्जाने की मांग को ‘नॉन-स्टार्टर’ (जिस पर चर्चा भी न की जा सके) करार दिया, हालांकि एक अन्य अधिकारी ने सुझाव दिया कि इसे ‘जब्त की गयी ईरानी संपत्तियों’ को मुक्त करने जैसे तंत्र के माध्यम से नया रूप दिया जा सकता है।

एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, “हमारा मानना है कि हमने ईरान की बढ़त को रोक दिया है और अमेरिका को विश्वास है कि ईरान अंततः बातचीत के लिये राजी हो जायेगा।”

अमेरिकी अधिकारियों ने शर्तों की एक शृंखला का जिक्र किया है। इसमें ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर पांच साल की रोक, ‘शून्य यूरेनियम संवर्धन’ और नतांज, इस्फहान व फोर्डो में प्रमुख परमाणु केंद्रों को बंद करना शामिल है।

अतिरिक्त प्रस्तावों में सेंट्रीफ्यूज उत्पादन की सख्त अंतरराष्ट्रीय निगरानी, मिसाइल रेंज सीमित करने के लिए क्षेत्रीय हथियार नियंत्रण व्यवस्था और हिजबुल्ला, हूती व हमास जैसे आतंकी समूहों के लिए वित्तीय सहायता बंद करना शामिल है। ये मांगें काफी हद तक अमेरिका के उन पुराने रुख को दर्शाती हैं, जिन्हें ईरान पहले ही खारिज कर चुका है। साथ ही, ईरानी अधिकारियों ने पिछली विफलताओं के बाद बातचीत की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाये हैं।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि हॉर्मुज के माध्यम से सामान्य आवाजाही बहाल करने के लिए अमेरिका-इजरायल को हमले रोकने होंगे और आगे तनाव न बढ़ाने की प्रतिबद्धता जतानी होगी। वहीं, ट्रंप प्रशासन के भीतर अधिकारी अभी इस बात का आकलन कर रहे हैं कि ईरान में बातचीत का अंतिम अधिकार किसके पास है।

श्री अराघची पिछली वार्ताओं में एक प्रमुख वार्ताकार रहे हैं, लेकिन अमेरिकी वरिष्ठ सहायकों का मानना है कि उनके पास अंतिम निर्णय लेने की शक्ति नहीं है। अमेरिका अब नये संभावित मध्यस्थों पर भी विचार कर रहा है, और ऐसे पक्षों की तलाश में है, जो अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच त्रिपक्षीय वार्ता को सुविधाजनक बना सकें।

ओमान ने पहले परमाणु वार्ताओं में मध्यस्थता की थी, लेकिन अब अधिकारी विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। गाजा वार्ता में भूमिका के बाद कतर को अधिक विश्वसनीय मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि कहा जा रहा है कि कतर एक लो-प्रोफाइल भूमिका निभाना पसंद करेगा। अधिकारियों का कहना है कि तैयारी जारी है, ताकि अगर हालात बदलते हैं और कूटनीतिक अवसर मिलता है तो प्रशासन तेजी से कदम उठा सके।

 

 

Next Post

एयर इंडिया समूह की पश्चिम एशिया के लिए सोमवार को 30 उड़ानें

Sun Mar 22 , 2026
नयी दिल्ली, 22 मार्च (वार्ता) एयर इंडिया और उसकी सहायक कंपनी एयर इंडिया एक्सप्रेस सोमवार को पश्चिम एशिया के लिए और वहां से कुल 30 उड़ानों का परिचालन करेगी। एयर इंडिया समूह ने रविवार को बताया कि 23 मार्च को पश्चिम एशिया और भारत के बीच उसकी 18 नियमित और […]

You May Like