गुना: मध्य प्रदेश के पुलिस महकमे को हिला देने वाले बहुचर्चित ‘गुना नोटकांड’ में आखिरकार बड़ी कार्रवाई हुई है। भ्रष्टाचार और अनैतिक गतिविधियों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का रुख अपनाते हुए प्रदेश सरकार ने गुना एसपी अंकित सोनी को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। यह बड़ी गाज उस मामले के बाद गिरी है, जिसमें धरनावदा थाना प्रभारी सहित चार पुलिसकर्मियों द्वारा एक करोड़ रुपये की कथित बंदरबांट का मामला सामने आया था।
एसपी अंकित सोनी ने 20 अप्रैल 2025 को गुना जिले की कमान संभाली थी, लेकिन वे अपना एक साल का कार्यकाल भी पूरा नहीं कर सके। महज 11 महीने के भीतर ही उन्हें इस विवादित कांड के चलते पद छोड़ना पड़ा। चर्चा है कि थाना स्तर पर हुए इतने बड़े लेनदेन और पुलिसकर्मियों की संदिग्ध भूमिका को लेकर जिला प्रमुख के रूप में उनकी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
उधर, इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से शासन की सख्त मंशा जाहिर की। मुख्यमंत्री ने अपने ट्वीट में स्पष्ट किया: “मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार और अनैतिक गतिविधियों के लिए कोई स्थान नहीं है। गुना की घटना में संलिप्तता पाए जाने पर किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस की छवि खराब करने वाले तत्वों पर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। हमारी सरकार शुचिता और पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है।” मुख्यमंत्री के इस कड़े संदेश के कुछ ही घंटों बाद विभाग में मची खलबली के बीच देर शाम एसपी अंकित सोनी को हटाए जाने के औपचारिक आदेश जारी हो गए।
