दमोह: पुलिस ने इंटरनेशनल ऑन लाइन गेमिंग प्लेटफार्म का खुलासा किया है.शनिवार शाम एएसपी सुजीत सिंह भदोरिया की मौजूदगी में इस मामले की जानकारी दी गई. यह पूरा अन्तर्राज्यीय गिरोह था, जो दमोह में बैठकर फर्जी सिम और म्यूट बैंक खातों की मदद से लोगों को सट्टा खिला रहा था. जिसमें करोड़ों रुपए का ट्रांजैक्शन भी मिला है.सायबर सेल और देहात थाना पुलिस की मदद से यह आरोपी पकड़े गए हैं.दमोह पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी के निर्देशन में यह कार्रवाई की गई है. कुल नो आरोपी अलग-अलग राज्यों के पकड़े गए और दमोह के दो लोगों को अभिरक्षा में लिया गया है,जिन्होंने किराए का मकान दिलवाया था.एएसपी सुजीत सिंह भदोरिया ने बताया उक्त गिरोह दमोह में मुश्की बाबा मंदिर पानी की टंकी के पास एक किराये के मकान में यह आनलाइन साइट WINBUZZ के नाम से आनलाइन गेम (सट्टा) खिलाने का काम करते थे.
यह सामग्री हुई बरामद…
एडिशनल एसपी ने बताया कि यह अंतरराज्यीय गिरोह फर्जी सिम और म्यूट अकाउंट के माध्यम से धोखाधड़ी कर रहा था.उनके पास से करीब तीस लाख 26 हज़ार रुपए का मशरूका जप्त किया गया है. जिसमें 8 लाख रुपए कैश, एक स्कॉर्पियो, 20 सिम, एयरटेल ब्राडबैंड,राउटर, 26 एंड्राइड मोबाइल जप्त किए गए हैं.
बाहरी राज्यों के हैं आरोपी
सभी नो आरोपी अलग-अलग राज्यों के पकड़े गए हैं. जिसमें हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के आरोपी शामिल है.यह लोग संगठित तरीके से मकान किराए पर लेकर यहां अपना सेटअप जमा कर ऑनलाइन धोखाधड़ी और म्यूट खातों का उपयोग कर रहे थे.पुलिस ने सभी लोगों पर मामला दर्ज कर जांच में लिया है.प्रारंभिक पूंछताछ में पता चला है कि आरोपी दो महीने से मकान किराए पर लेकर यहां पर रुके हुए थे. इस मामले में दमोह के दो लोगों को अभिरक्षा में लिया गया है. जिन्होंने मकान उपलब्ध कराया था. मकान मालिक की भूमिका भी संदिग्ध है. इन्होंने जो एग्रीमेंट किया है उसमें बाहर के लोग यहां दमोह में रह रहे थे. जिसकी जानकारी पुलिस को नहीं दी गई. पुलिस ने जो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद की है, उसमें करोड़ की राशि का ट्रांजैक्शन भी मिला है. अभी बैंक बंद है इसलिए ट्रांजैक्शन का खुलासा नहीं हो पाया है.
जैसे ही बैंक खुलते हैं तब पता चल पाएगा कि कौन-कौन से म्यूट अकाउंट में यह राशि ट्रांसफर की गई थी. साइबर सेल की टीम ने इसको ट्रेस किया है.जिसमें देहात थाना पुलिस की भी प्रमुख भूमिका रही है. अब पुलिस इस मामले में जांच कर रही है कि इस गिरोह में कौन-कौन लोग शामिल हैं.एडिशनल एसपी ने बताया कि ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म नशे की तरह काम करता है.आरोपी म्यूट अकाउंट का उपयोग कर हमारी राशि जमा कराते हैं और हार जीत का दाग लगवाते हैं. उन्होंने बताया कि हम कहीं ना कहीं कर्ज में फंसकर या छोटे बच्चे इस प्रकार के गेमिंग में फंसकर आत्मघाती कदम भी उठा लेते हैं. इसलिए इस तरह के गेमिंग प्लेटफार्म का सावधानी से उपयोग करें और यदि कोई व्यक्ति अन्य माध्यमों से राशि की मांग करता है, तो उसे किसी भी प्रकार की राशि ट्रांसफर ना करें.जिस लिंक से यह ऑनलाइन गेम खिलाया जा रहा था, उस लिंक को ओपन करने पर बहुत सारे छोटे-छोटे गेमिंग प्लेटफार्म खुलते हैं.जिनकी आईडी पासवर्ड आरोपी ही जनरेट करके लोगों को उपलब्ध कराते हैं.
यह बने आरोपी
अलग-अलग राज्यों के जो आरोपी गिरफ्तार किए हैं. उनमें
रोहन भाटिया पिता रामकृष्ण भाटिया 31 निवासी मुड्डीकला थाना बद्दी जिला सोलन हिमाचल प्रदेश, सूरज पिता तपेश्वर मौर्या 23 निवासी पुष्कर खुर्द सुलगपुरी थाना बरहलगंज जिला गोरखपुर (उत्तर प्रदेश), परमिंदर पिता सुरिंदर सिंह 34 निवासी प्लाट नम्बर 50 प्रियदर्शिनी कालोनी हाउसिंग बोर्ड कैलाश नगर थाना जामूल जिला दुर्ग छत्तीसगढ, अमित कुमार पिता विजय कुमार साहू 28 निवासी ग्राम सिवनी बिलौदा, थाना चांपा जिला जांजगीर चांपा छतीसगढ, राजेन्द्र कुमार पिता रोहित कुमार साहू 25 निवासी ग्राम ठाकुरिया थाना नवागढ़ जिला जांजगीर चापा छतीसगढ, संदीप मंडल पिता उमेश मंडल 25 निवासी मकान नंबर 105 खुर्शीपार, बाबा बालक नाथ मंदिर के पास थाना
खुर्शीपार जिला दुर्ग छत्तीसगढ,
उदय कुमार केसरी पिता संजय केशरी 23 निवासी पानी की टंकी के पास केनाल रोड भिलाई पावर स्टेशन थाना छावनी जिला दुर्ग छत्तीसगढ, मंजीत सिंह कलसी पिता सतनाम सिंह कलसी 41 निवासी नर्मदा नगर थाना ग्वारीघाट जबलपुर, संजय कुमार सिंह पिता प्रकाश सिह 32 निवासी शर्मा आश्रम मांझी चौक भिलाई थाना खुरसीपार शामिल हैं.
इनका रहा सहयोग
इस गिरोह को पकड़ने में सीएसपी एचआर पांडे, देहात थाना प्रभारी अमित गौतम, साइबर सेल प्रभारी टीआई नेहा गोस्वामी, चौकी प्रभारी विक्रम दांगी,सब इंस्पेक्टर रोहित द्विवेदी, साइबर सेल राकेश अठ्या, सौरभ टंडन, मयंक, रोहित सिंह,मनोहर,प्रधान आरक्षक सचिन नामदेव, नीरज श्रीवास्तव,आरक्षक रामकुमार, यशवंत, अखिलेश,राहुल, शाहवाज खान, विमल के साथ अन्य सभी पुलिसकर्मियों का विशेष योगदान रहा.
