खंडवा: निमाड़ की प्राचीन संस्कृति और लोक आस्था का महापर्व ‘गणगौर’ का उत्साह चरम पर है। शनिवार को खंडवा तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में उत्सव का उल्लास चरम पर देखा गया। क्षेत्र के सिलोदा, बडगांव गुर्जर, सिरपुर, और कोरगला पंजारिया सहित अनेक गांवों में श्रद्धा और भक्ति के साथ ‘बाड़ी पूजन’ किया गया, जिसके बाद माता रेणुका और धनियार राजा के रथ भ्रमण के लिए निकाले गए।शनिवार सुबह से ही इन गांवों में उत्सव का माहौल रहा। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने मंगल गीतों के साथ ज्वारों की बाड़ी का पूजन किया।
‘माता की सेवा’ के नौ दिनों के कठिन अनुष्ठान के बाद, जब ज्वारों को बाड़ी से बाहर निकाला गया, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। ढोल-ताशों की थाप और ‘मारे रणुबाई को घोड़लो आयो’ के गगनभेदी जयकारों के साथ माता के रथों का ग्राम भ्रमण शुरू हुआ। ग्रामीणों ने अपने घरों के सामने रंगोली सजाकर और पुष्प वर्षा कर माता की अगवानी की। सिलोदा और बडगांव गुर्जर में घर में माता के आगमन की खुशी दीपावली जैसी होती है।
सिरपुर और कोरगला पंजारिया में भी युवाओं और बुजुर्गों ने बड़े उत्साह के साथ रथों को अपने कंधों पर उठाकर भ्रमण कराया। ग्रामीण अंचलों में मान्यता है कि बाड़ी के ज्वारे जितने पुष्ट और ऊंचे होते हैं, गांव में उतनी ही सुख-समृद्धि और अच्छी फसल आती है। बदलते दौर में भी इन गांवों ने अपनी जड़ों को मजबूती से थामे रखा है। शनिवार को निकले इन रथों में न केवल धार्मिक आस्था दिखी, बल्कि निमाड़ी लोक कला के दर्शन भी हुए। जगह-जगह लोक नृत्य और पारंपरिक गीतों ने समां बांध दिया। देर शाम तक चले इस भ्रमण के बाद बाड़ी के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
