श्रीनगर | जम्मू-कश्मीर की एक अदालत ने श्रीनगर नगर निगम (SMC) को जवाहर नगर स्थित एक संयुक्त परिवार के रिहायशी मकान को गिराने से सख्ती से रोक दिया है। म्युनिसिपल मजिस्ट्रेट फिदाह हुसैन नायेक ने 18 पन्नों के विस्तृत फैसले में स्पष्ट किया कि यदि अधिकारी वर्षों तक निर्माण पर चुप रहे, तो वे अचानक इसे ढहाने की कार्रवाई नहीं कर सकते। वादी गुलाम नबी डार और उनके भतीजे मोहम्मद अयूब डार ने साल 2017 में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने उनके पक्ष में ‘स्थायी निषेधाज्ञा’ (Perpetual Injunction) जारी करते हुए निगम को निर्देश दिया कि वे परिवार के शांतिपूर्ण कब्जे और निर्माण में किसी भी तरह का हस्तक्षेप न करें।
यह मामला साल 2014 की विनाशकारी बाढ़ से जुड़ा है, जिसमें डार परिवार का पुश्तैनी घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। परिवार ने 2015 में दो मंजिला मकान के पुनर्निर्माण की अनुमति ली थी, लेकिन बड़े संयुक्त परिवार की जरूरत देखते हुए अतिरिक्त मंजिल की इजाजत मांगी। जब लंबे समय तक SMC अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया, तो परिवार ने इसे ‘मौन स्वीकृति’ मानकर निर्माण पूरा कर लिया। कोर्ट ने नोट किया कि नगर निगम ने 2018 तक अपना लिखित जवाब दाखिल करने का अधिकार भी खो दिया था और बचाव पक्ष ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर सका जिससे निर्माण को अवैध साबित किया जा सके।
जज ने अपने फैसले में प्रशासनिक निष्क्रियता पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह निर्माण अधिकारियों की जानकारी में हुआ था, इसलिए अब इसे ढहाना न्यायसंगत नहीं है। कोर्ट ने श्रीनगर नगर निगम को आदेश दिया है कि वह अगले 60 दिनों के भीतर इस अतिरिक्त निर्माण को नियमित (Regularize) करने पर अंतिम फैसला ले। अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि ढांचा मास्टर प्लान का उल्लंघन न करे। वादी परिवार को निर्देश दिए गए हैं कि वे साइट मैप और जरूरी दस्तावेज जमा करें ताकि निगम नियमानुसार प्रक्रिया को पूर्ण कर सके। इस फैसले से उन परिवारों को बड़ी राहत मिली है जो तकनीकी कारणों से प्रशासनिक कार्रवाई का डर झेल रहे थे।

