इंदौर: अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत लगभग 400 करोड़ रुपए की लागत से इंदौर के प्रमुख रेलवे स्टेशन (इंदौर जंक्शन) का कायाकल्प किया जा रहा है, जिसे एयरपोर्ट की तरह 7 मंजिला इमारत के रूप में विकसित किया जाना है. लेकिन स्टेशन के पुनर्विकास के इस कार्य में देरी की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे 2028 के सिंहस्थ से पहले प्रोजेक्ट पूरा होने पर सवाल उठने लगे हैं. शुरुआत में ही खुदाई और बेसमेंट पार्किंग का काम धीमी गति से चल रहा है. पुरानी बिल्डिंग को तोडऩे का काम भी अधूरा है.
निर्माण कार्य के चलते स्टेशन की पुरानी पार्किंग को अस्थायी रूप से प्लेटफॉर्म नंबर 1 के सामने शिफ्ट कर दिया गया है, लेकिन यहां सुविधाओं का अभाव देखने को मिल रहा है. पार्किंग स्थल पर जगह सीमित होने के कारण यात्रियों और उनके परिजनों को वाहन खड़े करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कई बार भीड़ बढऩे पर वाहन चालकों को लंबा इंतजार करना पड़ता है, जिससे अव्यवस्था की स्थिति बन जाती है.
यदि निर्माण कार्य की गति इसी तरह धीमी रही तो निर्धारित समय सीमा में प्रोजेक्ट पूरा करना चुनौती बन सकता है, ऐसे में प्रशासन को निर्माण कार्य में तेजी लाने के साथ-साथ अस्थायी पार्किंग में भी बेहतर व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि स्टेशन आने-जाने वाले लोगों को राहत मिल सके. यात्रियों को उम्मीद है कि जिम्मेदार विभाग जल्द ही स्थिति पर ध्यान देकर निर्माण कार्य की रफ्तार बढ़ाएंगे, ताकि इंदौर को समय पर आधुनिक और सुविधाजनक रेलवे स्टेशन मिल सके.
यह बोले नागरिक…
सिंहस्थ 2028 से पहले प्रोजेक्ट पूरा करने की बात कही गई है, इसलिए जिम्मेदार विभाग को निर्माण कार्य की गति बढ़ाने की जरूरत है. गतिहीन कार्य होने से समय सीमा पर सवाल उठ रहे हैं.
– विजय गाजरे
रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास की घोषणा तो बड़े स्तर पर हुई थी, लेकिन अभी तक बेसमेंट की खुदाई ही पूरी नहीं हो पाई है. काम की रफ्तार बहुत धीमी नजर आ रही है.
– फारूक मंसूरी
अस्थायी पार्किंग में पर्याप्त जगह और सुविधाएं नहीं हैं. रोजाना वाहन खड़े करने में लोगों को परेशानी होती है और कई बार लंबा इंतजार करना पड़ता है, इसलिए एक और पार्किंग स्थल की विकल्प के रूप में व्यवस्था की जानी चाहिए.
– पंकज कुशवाह
