बारह इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने पड़ोसी देशों पर ईरान के हमलों की निंदा की

रियाध/नयी दिल्ली, 19 मार्च (वार्ता) अरब और इस्लामी देशों के 12 विदेश मंत्रियों ने पड़ोसी देशों पर ईरानी हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि ऐसे हमलों को किसी भी बहाने से उचित नहीं ठहराया जा सकता है। अज़रबैजान, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों ने गुरुवार को रियाध में एक बैठक की और तत्काल शत्रुता समाप्त करने एवं अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने का आह्वान किया। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के अनुसार राज्यों के आत्मरक्षा के अधिकार की पुष्टि भी की गयी है। बैठक के बाद जारी एक बयान में, विदेश मंत्रियों ने तेल सुविधाओं, विलवणीकरण संयंत्रों, हवाई अड्डों, आवासीय स्थलों, राजनयिक मिशनों सहित आवासीय क्षेत्रों एवं नागरिक अवसंरचना को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के सुनियोजित ईरानी हमलों की निंदा की है। nसऊदी अरब के दूसरे सबसे बड़े अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र, सऊदी गजट के अनुसार, उन्होंने ईरान से तत्काल अपने हमलों को रोकने, अंतरराष्ट्रीय कानून एवं अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का सम्मान करने, क्षेत्रीय स्थिरता को बहाल करने और तनाव कम करने की दिशा में पहले कदम के रूप में अच्छे पड़ोसी होने के सिद्धांतों का पालन करने का आह्वान किया।

सऊदी गजट के अनुसार, विदेश मंत्रियों ने इस बात पर बल दिया कि ईरान के साथ संबंधों का भविष्य अन्य देशों की संप्रभुता के सम्मान, उनके आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप और पड़ोसी देशों को धमकाने के लिए सैन्य क्षमताओं का उपयोग करने से परहेज करने पर निर्भर करता है। उन्होंने ईरान से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) का पालन करने, सभी हमलों को तुरंत रोकने और किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई से बचने का भी आग्रह किया, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय नौवहन को बंद करने, बाधित करने या बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा को कमजोर करने की धमकी शामिल है।
बैठक के बाद आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने कहा कि ईरान पर भरोसा पूरी तरह से टूट चुका ह” और उसके मौजूदा व्यवहार को देखते हुए तेहरान को भागीदार नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि ईरान की कार्रवाइयां दर्शाती हैं कि वह पड़ोसी देशों के साथ वास्तविक संवाद में विश्वास नहीं रखता बल्कि दबाव और राजनीतिक एवं सुरक्षा संबंधी दबाव पर निर्भर है। उन्होंने पड़ोसी देशों और समुद्री नौवहन पर ईरानी हमलों को एक खतरनाक प्रसार एवं अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन बताया जो क्षेत्रीय सुरक्षा एवं स्थिरता को कमजोर करने के उद्देश्य से एक निरंतर रणनीति को दर्शाता है।

प्रिंस फैसल ने कहा कि ईरान ने इन हमलों की पूर्वनियोजित योजना बनाई थी जिससे संकेत मिलता है कि ये अलग-थलग घटनाएं नहीं थीं बल्कि तनाव बढ़ाने की एक व्यवस्थित नीति का हिस्सा थीं। उन्होंने कहा कि ईरान अपने क्षेत्रीय पड़ोसी देशों के प्रति शत्रुतापूर्ण दृष्टिकोण निरंतर जारी रखा हुआ है। nसऊदी गजट के अनुसार, विदेश मंत्री ने ईरान के स्पष्टीकरणों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और उन्हें व्यापक दबाव नीति को छिपाने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि लगातार गलत अनुमान लगाने से तेहरान को राजनीतिक एवं व्यापक परिणाम भुगतने पड़ेंगे। nप्रिंस फैसल ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब को आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है और इस बात पर बल दिया कि उचित समय पर सही निर्णय लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर ईरान यह मानता है कि खाड़ी देश जवाबी कार्रवाई करने में असमर्थ हैं तो वह गलतफहमी में है। प्रिंस फैसल ने क्षेत्र में अमेरिका की उपस्थिति को हमलों से जोड़ने वाले ईरान के तर्कों को भी खारिज कर दिया और कहा कि ऐसे दावे विश्वसनीय नहीं हैं क्योंकि लक्ष्यों में ऐसे देश और सुविधाएं शामिल थीं जिनका उन बातों से कोई संबंध नहीं था।
28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने खाड़ी सहयोग परिषद के सभी छह देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। अबू धाबी और दुबई पर हुए कई हमलों में आठ नागरिक मारे गए और 150 से अधिक घायल हुए। मृतकों में पाकिस्तान, नेपाल, बंगलादेश और फिलिस्तीन के नागरिक शामिल हैं। कुवैत में छह लोग मारे गए और कई घायल हो गए। ये हमले अमेरिकी हवाई अड्डे के पास एक स्थान को निशाना बनाकर किए गए। ओमान में दो बंदरगाहों पर ड्रोन हमलों में तीन लोग मारे गए और लगभग 15 घायल हो गए। बहरीन में, अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय सहित कई ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
सऊदी अरब में, अल खारज के रिहायशी इलाकों और रास तनुरा रिफाइनरी में मिसाइलें दागी गई। कतर में, आज सुबह अल उदैद एयर बेस और रास लाफान पर कई हमले किए गए।

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