गुरुग्राम | दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू ने उभरते हुए खिलाड़ियों को आगाह किया है कि वे केवल खेल के भरोसे अपनी पढ़ाई को नजरअंदाज न करें। गुरुग्राम के डीपीएस इंटरनेशनल में शिक्षाविद देवयानी जयपुरिया से चर्चा के दौरान सिंधू ने जोर देकर कहा कि खेल करियर अनिश्चितताओं से भरा होता है, जबकि शिक्षा जीवन भर साथ निभाती है। उन्होंने साझा किया कि कोई भी खिलाड़ी 50 या 60 साल की उम्र तक शीर्ष स्तर पर नहीं खेल सकता, इसलिए रिटायरमेंट के बाद के जीवन के लिए शैक्षिक योग्यता अनिवार्य है। सिंधू ने स्वयं एमबीए किया है और उन्होंने बताया कि ट्रेनिंग के कठिन शेड्यूल के बीच पढ़ाई जारी रखना आसान नहीं है, लेकिन भविष्य के लिए यह अत्यंत आवश्यक है।
सिंधू ने अपने करियर के सबसे कठिन दौर को याद करते हुए बताया कि 2015 में उनके बाएं पैर में ‘स्ट्रेस फ्रैक्चर’ हो गया था, जिसने उनके करियर पर सवालिया निशान लगा दिया था। उन्होंने चेतावनी दी कि खेल में चोटें बताकर नहीं आतीं और एक गंभीर चोट या सर्जरी किसी भी खिलाड़ी का करियर हमेशा के लिए खत्म कर सकती है। ऐसे समय में यदि खिलाड़ी के पास शिक्षा का विकल्प नहीं है, तो वह मानसिक और आर्थिक रूप से टूट सकता है। उन्होंने राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद की बात का समर्थन करते हुए अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों के लिए शिक्षा को प्राथमिकता दें ताकि वे जीवन की हर परिस्थिति के लिए तैयार रहें।
30 वर्षीय स्टार शटलर ने बताया कि 2016 के रियो ओलंपिक से ठीक पहले वे गंभीर दर्द से जूझ रही थीं और उन्हें खुद पर शक होने लगा था। इसके बावजूद उन्होंने कड़ी मेहनत की और रजत पदक जीतकर इतिहास रचा। वर्तमान में वे एक संक्षिप्त ब्रेक पर हैं और हाल ही में इजरायल-ईरान युद्ध के कारण हवाई क्षेत्र बंद होने से उन्हें दुबई में रुकना पड़ा था। सिंधू ने अंत में कहा कि उनकी बात शायद अभी युवा खिलाड़ियों को कड़वी लगे, लेकिन जीवन के बाद के पड़ाव में उन्हें समझ आएगा कि खेल एक छोटा हिस्सा है, जबकि पढ़ाई असली पूंजी है। उनका मानना है कि सही संतुलन ही एक खिलाड़ी को पूर्ण व्यक्तित्व प्रदान करता है।

