हैदराबाद लैब की रिपोर्ट न आने का मिला लाभ, 26 टन गौमांस मामले में असलम कुरैशी को मिली राहत

भोपाल। गौमांस तस्कर के आरोपी असलम कुरैशी उर्फ चमड़ा को बुधवार को भोपाल सेशन कोर्ट से जमानत मिल गई. कोर्ट में सुनवाई के दौरान असलम के वकील ने हैदराबाद लैब की रिपोर्ट न आने का भी हवाला दिया. दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश पंकज कुमार जैन की कोर्ट ने 35 हजार रुपए के बांड पर जमानत आदेश पारित किए. मामले में भानू हिंदू ने असलम की जमानत पर आपत्ति लगाई थी.

मामले में 500 पन्नों की आरोपपत्र दाखिल करने के 12 दिन बाद कोर्ट का निर्णय आया है. इस पर जय मां भवानी संगठन और उसके अध्यक्ष भानु हिंदू तथा संस्कृति बचाओ मंच के चंद्र शेखर तिवारी ने आरोपियों को दी गई राहत के खिलाफ बड़े पैमाने पर आंदोलन की धमकी दी है. इस मौके पर चंद्र शेखर तिवारी ने कहा कि इतनी तादाद में गौमांस मिलने के बाद भी आरोपी को जमानत मिली है, इस पर भी संदेह पैदा हो रहा है. उन्होंने कहा कि मामले में रासूका की मांग की जा रही है.

कोर्ट में असलम के वकील जगदीश गुप्ता ने तर्क दिया कि असलम के खिलाफ मामला संदिग्ध आधारों पर बना है. एसआईटी ने मथुरा के प्रयोगशाला से गोमांस की मौजूदगी की पुष्टि करने वाली रिपोर्ट तो प्रस्तुत की, लेकिन हैदराबाद फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट प्रस्तुत करने में विफल रही, जहां कलेक्टर के निर्देशों के बाद नमूने भेजे गए थे.

गुप्ता का मामले में कहना है कि हैदराबाद की प्रयोगशाला रिपोर्ट की नहीं आना पूरी जांच को संदिग्ध बनाता है. इन्हीं आधारों पर अदालत ने अभियोजन पक्ष और हिंदू संगठनों के विरोध को खारिज करते हुए सशर्त जमानत दे दी.

बता दें कि असलम को लोअर कोर्ट से राहत नहीं मिलने पर उसके एडवोकेट ने सेशन कोर्ट में जमानत अर्जी लगाई थी. इस मामले में बुधवार को कोर्ट में सुनवाई हुई.

बता दें कि 17 दिसंबर को पुलिस मुख्यालय के सामने एक ट्रक पकड़ी गई थी, जिसमें 26 टन गोमांस मिलने की जानकारी सामने आई. पुलिस ने मौके पर ही गौमांस से भरे ट्रक के ड्राइवर गिरफ्तार किया था और फिर असलम चमड़ा की गिरफ्तारी की गई थी. तत्कालीन पुलिस कमिश्नर ने इस मामले में जांच के लिए एसआईटी का गठन किया. एसीपी उमेश तिवारी की अगुवाई में अन्य पुलिस विभाग के अधिकारी मामले की तहकीकात की थी.

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