बेंगलुरु | ‘फाउंडिट इनसाइट्स ट्रैकर’ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जॉब मार्केट में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव आया है। अब कंपनियां उन उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही हैं जो बिना किसी लंबे नोटिस पीरियड के तुरंत कार्यभार संभाल सकें। रिपोर्ट के मुताबिक, नियोक्ताओं की ओर से त्वरित नियुक्तियों की मांग (हायरिंग अर्जेन्सी) साल 2022 के मुकाबले 58 प्रतिशत तक बढ़ गई है। बाजार में ‘इमीडिएट जॉइनर’ की मांग और उपलब्धता के बीच गहरा अंतर पैदा हो गया है, जिससे कंपनियों के लिए सही टैलेंट ढूंढना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
इस बदलते ट्रेंड का सबसे ज्यादा असर मिड-लेवल पेशेवरों (3-6 साल का अनुभव) पर दिख रहा है। तत्काल नियुक्तियों की कुल मांग का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इसी वर्ग से है। कंपनियां अब महीनों की ट्रेनिंग के बजाय ऐसे अनुभवी कर्मचारियों को चाहती हैं जो हफ्तों के भीतर उत्पादकता देना शुरू कर दें। विशेष रूप से आईटी (IT) और बीएफएसआई (BFSI) क्षेत्रों में सख्त प्रोजेक्ट टाइमलाइन के कारण कॉन्ट्रैक्ट हायरिंग और गिग वर्कर्स का चलन तेजी से बढ़ा है, ताकि टैलेंट की कमी को तुरंत पूरा किया जा सके।
आंकड़ों के अनुसार, त्वरित नियुक्तियों की 75 प्रतिशत मांग भारत के टॉप पांच मेट्रो शहरों से आ रही है। हालांकि, टियर 2 और टियर 3 शहरों में तुरंत ज्वाइन करने वाले उम्मीदवारों की उपलब्धता मेट्रो शहरों की तुलना में थोड़ी बेहतर है, जो उन्हें कंपनियों के लिए एक नया आकर्षक केंद्र बना रही है। वर्तमान में स्थिति यह है कि जहां 27 प्रतिशत मांग 15 दिनों के भीतर ज्वाइन करने वालों की है, वहीं केवल 14 प्रतिशत पेशेवर ही इस समय सीमा में उपलब्ध हैं। यह रिपोर्ट संकेत देती है कि भविष्य में नौकरी पाने के लिए ‘स्किल’ के साथ-साथ ‘तुरंत उपलब्धता’ एक बड़ा पैमाना बनेगी।

