
भोपाल। महेश्वर की निवासी कुंभ गर्ल मोनालिसा और फरमान खान के कथित विवाह को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता नाजिया इलाही खान ने कई कानूनी और सामाजिक सवाल उठाते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मीडिया को दिए बयान में कहा कि यदि फरमान खान स्वयं को मुस्लिम मानते हैं, तो हिंदू परंपराओं के अनुसार मंदिर में विवाह करना कानून और धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उनका कहना था कि इस तरह की घटनाओं में धार्मिक परंपराओं का दुरुपयोग होने की आशंका रहती है, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
खान ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से अपील करते हुए कहा कि अंतरधार्मिक विवाहों से जुड़े विवादित मामलों के लिए मौजूदा कानूनी प्रावधान पर्याप्त नहीं हैं। उनके अनुसार भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 ऐसे मामलों को समुचित रूप से संबोधित नहीं कर पाती, इसलिए स्पष्ट और कड़े कानून बनाए जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कुछ संगठनों की संभावित भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए सुरक्षा एजेंसियों से पूरे घटनाक्रम की गहन जांच करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि यदि किसी तरह की साजिश या अवैध गतिविधि के संकेत मिलते हैं, तो संबंधित एजेंसियों को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
मोनालिसा के परिवार की स्थिति का उल्लेख करते हुए खान ने कहा कि इस घटना से परिजनों, विशेषकर उसकी मां पर मानसिक प्रभाव पड़ा है। उन्होंने प्रशासन से परिवार की सुरक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखने की मांग की। साथ ही केरल सरकार से अपील की कि मोनालिसा की उसकी मां से बातचीत करवा कर स्थिति स्पष्ट कराई जाए।
खान ने यह भी दावा किया कि मोनालिसा नाबालिग हो सकती है और कथित तौर पर गलत जानकारी के आधार पर दस्तावेज तैयार कर विवाह प्रमाणपत्र के लिए उपयोग किए गए हैं। उन्होंने आशंका जताई कि जल्दबाजी में तैयार कराए गए पासपोर्ट के जरिए उसे विदेश भेजने की कोशिश हो सकती है।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी वैध विवाह या व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विरोध करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सभी प्रक्रियाएं कानून के दायरे में और पारदर्शी तरीके से पूरी हों।
