मुंबई | रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी अपनी टेलीकॉम और डिजिटल इकाई ‘जियो प्लेटफॉर्म्स’ को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की तैयारी कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ (IPO) साबित हो सकता है। कंपनी इस मेगा इश्यू के लिए गोल्डमैन सैक्स, मॉर्गन स्टेनली और कोटक महिंद्रा कैपिटल जैसे दिग्गज वैश्विक और भारतीय निवेश बैंकों के साथ मिलकर काम कर रही है। लगभग दो दशकों में रिलायंस समूह की किसी बड़ी इकाई का यह पहला पब्लिक इश्यू होगा, जिसे लेकर निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
बैंकिंग सूत्रों के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स का संभावित मूल्यांकन 170 अरब डॉलर (करीब 14 लाख करोड़ रुपये) के आसपास आंका जा सकता है। यदि कंपनी नियमों के तहत महज 2.5% हिस्सेदारी भी बेचती है, तो वह बाजार से लगभग 35,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटा सकती है। यह राशि एलआईसी (LIC) के अब तक के सबसे बड़े आईपीओ रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ सकती है। जियो वर्तमान में न केवल देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है, बल्कि क्लाउड, फिनटेक और डिजिटल सेवाओं में भी तेजी से पैर पसार रही है, जिससे इसकी वैल्यूएशन लगातार बढ़ रही है।
साल 2026 की पहली तिमाही में भारतीय आईपीओ बाजार की रफ्तार थोड़ी धीमी रही है, जहाँ पिछले साल के मुकाबले फंड जुटाने में गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में जियो प्लेटफॉर्म्स का शेयर बाजार में उतरना निवेशकों के लिए किसी बड़े वरदान से कम नहीं होगा। जैसे ही ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) सेबी के पास दाखिल होगा, बाजार में लिक्विडिटी और निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, आईपीओ की सटीक समय सीमा और आकार में बदलाव की संभावना बनी हुई है, लेकिन इस कदम से भारतीय शेयर बाजार की वैश्विक साख और मजबूत होगी।

