जबलपुर: जिला उपभोक्ता आयोग ने इंटीरियर डिजाइन कंपनी व उसके मालिक सिद्धार्थ खरे को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। परिवादी निखिल भट्ट की ओर से अधिवक्ता कार्तिक जग्गी ने पक्ष रखा।उन्होंने दलील दी कि संबंधित इंटीरियर कंपनी ने पहले कम दर पर कार्य करने का अनुबंध किया, लेकिन बाद में अपने ही अनुबंध से पलटते हुए उससे इंकार कर दिया। अधिवक्ता के अनुसार कंपनी ने अनुचित व्यापार प्रथा अपनाते हुए परिवादी को भ्रमित किया और कार्य को लेकर लगातार टालमटोल करती रही।
निर्धारित समयावधि में काम पूरा नहीं किया गया। इतना ही नहीं, कंपनी की ओर से परिवादी के फोन काल और संदेशों का जवाब देना भी बंद कर दिया गया। अधिवक्ता ने यह भी कहा कि कंपनी द्वारा जो आंशिक कार्य किया गया, वह भी सेवा में कमी (डिफिशिएंसी आफ सर्विस) की श्रेणी में आता है। अधिवक्ता के तर्कों का संज्ञान लेते हुए उपभोक्ता न्यायालय ने कंपनी और उसके मालिक को नोटिस जारी कर मामले में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
