जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा कि जब याचिकाकर्ता के विरुद्ध रिकवरी आदेश निरस्त हो चुका था, तो सरकार को उसे भुगतान कर देना चाहिए था। हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देशित किया है कि याचिकाकर्ता को 6 फीसदी ब्याज के साथ ग्रेच्युटी का भुगतान करें। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने इसके लिए 30 दिन की मोहलत दी है।
जबलपुर निवासी सेवानिवृत्त शासकीय सेवक सुमन तिवारी की ओर से अधिवक्ता एनके तिवारी एवं गर्वित तिवारी ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा याचिकाकर्ता को ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया गया।
दिसंबर 2021 में विभाग ने याचिकाकर्ता के विरुद्ध 3 लाख 23 हजार रुपए की रिकवरी निकाली थी। हाईकोर्ट ने अगस्त 2023 में उक्त रिकवरी आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके बावजूद ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया गया, इसलिए दोबारा हाईकोर्ट आना पड़ा। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये।
