
सीधी।सीधी इन दिनों रंगमंच के क्षेत्र में लगातार नए-नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। सीधी के कलाकार देश ही नही बल्कि विदेशों में भी जिले का परचम लहरा रहे है इसी क्रम में भारत भवन में स्त्री रचनाशीलता को समर्पित छह दिवसीय ‘आद्या समारोह’ का आयोजन 17 मार्च से किया जा रहा है। महिलाओं की सृजनात्मक दृष्टि, संवेदना और कलात्मक नेतृत्व पर केंद्रित इस सांस्कृतिक उत्सव का संयोजन भारत भवन के रंगमंडल प्रभाग द्वारा किया गया है। इस कार्यक्रम में जिले की अग्रणी रंगसंस्था रंगदूत सीधी का नाटक दर्पचूर्ण का चयन हुआ है । जिसका निर्देशन भारती शर्मा सोनी कर रही हैं। भारती ने बताया कि इस समारोह के माध्यम से रंगमंच पर स्त्री संवेदना, विचार और रचनात्मक नेतृत्व को केंद्र में लाने का प्रयास किया गया है। विविध कथ्य और शैली वाले इन नाटकों के जरिए स्त्री दृष्टि से समाज, संबंधों और मानवीय अनुभवों की नई व्याख्या देखने को मिलेगी। समारोह की विशेषता है कि इसमें प्रस्तुत होने वाले सभी नाटक महिला निर्देशकों द्वारा निर्देशित होंगे, दृष्टि की सशक्त उपस्थिति को रेखांकित करेंगे। भारत भवन में 17 मार्च से शुरू होने वाले इस समारोह में रंगदूत सीधी द्वारा प्रसिद्ध कथाकार शरतचन्द्र की कहानी पर आधारित नाटक “दर्प चूर्ण” का मंचन भारत भवन जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित मंच पर रंगदूत सीधी के कलाकारों की प्रस्तुति न केवल जिले के लिए गौरव की बात है, बल्कि यह सीधी के रंगमंच की बढ़ती पहचान और संभावनाओं को भी दर्शाती है। यह नाटक मानवीय संबंधों, अहंकार और गलतफहमियों के कारण टूटते रिश्तों की संवेदनशील कहानी को सामने लाता है। नाटक का मूल भाव इस विचार पर आधारित है कि “टूटना अहंकार को चाहिए, लेकिन अक्सर जीवन में अहंकार के कारण रिश्ते टूट जाते हैं।” कहानी उस दौर की है जब भारतीय समाज में स्त्रीवादी सोच का प्रभाव प्रारंभ हो रहा था और आर्थिक परिस्थितियों के कारण परिवारों में तनाव बढ़ रहा था। कहानी नरेन्द्र और इंदु नामक दंपत्ति के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है। नरेन्द्र एक संवेदनशील कलाकार है जो बेरोजगारी और आर्थिक कठिनाइयों से जूझता रहता है, जबकि इंदु संपन्न परिवार से संबंध रखती है और जीवन में आर्थिक स्थिरता व सामाजिक प्रतिष्ठा को अधिक महत्व देती है। इसी कारण वह अक्सर नरेन्द्र की गरीबी और बेरोजगारी को लेकर ताने देती रहती है। हालांकि दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते हैं, लेकिन अहंकार और गलतफहमियों के कारण उनके रिश्ते में दूरी बढ़ती जाती है। कहानी में विमला नामक पात्र दोनों के बीच एक सेतु का काम करती है और उन्हें फिर से जोड़ने का प्रयास करती है। यह नाटक स्त्री-पुरुष संबंधों के उतार-चढ़ाव और अहंकार के कारण पैदा होने वाले संघर्ष को बेहद संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करता है। मंच पर इंदु की भूमिका में भारती, विमला की भूमिका में अनंतिका मिश्रा, नरेन्द्र के रूप में प्रसन्न सोनी। नाटक की मूल कहानी प्रसिद्ध साहित्यकार शरतचन्द्र की है, जिसका नाट्य रूपांतरण प्रसन्न सोनी ने किया है। प्रस्तुति में प्रकाश व्यवस्था आदर्श शर्मा ‘चिंटू’, संगीत चयन विमल कृष्णा तथा संगीत संचालन विशाल बरुआ का है । मंच परिकल्पना, वेशभूषा एवं निर्देशन भारती शर्मा सोनी का रहेगा।
