वाशिंगटन 16 मार्च (वार्ता) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच सोमवार को विभिन्न देशों पर आयात शुल्क लगाने के उनके फैसले को पलटने को लेकर उच्चतम न्यायालय की कड़ी आलोचना की। गौरतलब है कि पिछले दिनों अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने टैरिफ लगाने के श्री ट्रम्प के निर्णय को असंवैधानिक करार देते हुए उसे पलट दिया गया था और इससे प्रभावित होने वाले देशों और कंपनियों को खरबों डॉलर दिए जाएंगे। श्री ट्रंप ने कहा है कि उन्हें किसी अन्य रूप में टैरिफ लगाने का पूर्ण अधिकार है। उन्होंने कहा कि टैरिफ लगाने का निर्णय उनके लिए सबसे अधिक मायने रखता था। उन्होंने कहा कि न्यायालय को पता था कि वह अमेरिका के लिए इसे कितनी शिद्दत से चाहते थे। इसके बजाय न्यायालय ने संभावित रूप से उन देशों और कंपनियों को खरबों डॉलर देने का फैसला किया, जो दशकों से अमेरिका का फायदा उठा रहे हैं।”
श्री ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने इन देशों को बहुत खुश कर दिया है। उन्होंने कहा, “जैसा कि न्यायालय ने भी बताया है, मुझे किसी अन्य रूप में टैरिफ लगाने का पूर्ण अधिकार है और मैंने ऐसा करना शुरू भी कर दिया है।” ईरान के साथ चल रहे तीखे टकराव के बीच सोमवार को टैरिफ पर अमेरिकी राष्ट्रपति का यह पोस्ट एक बड़ी कानूनी हार के बाद अपनी सत्ता और अधिकार को फिर से स्थापित करने का एक प्रयास प्रतीत होता है। हाल के सोशल मीडिया पोस्ट में, उन्होंने दावा किया था कि उन्हें वैकल्पिक रूपों में टैरिफ लगाने का पूर्ण अधिकार है।
उन्होंने कहा कि ये चाहते हैं कि अमेरिका उन सैकड़ों अरबों डॉलर को वापस करे, जो उन लोगों को दिए जाने हैं जिन्होंने अमेरिकी जनता का ‘अपमान’ किया है। इसे एक और वजह के तौर पर देखा जाना चाहिए कि अमेरिका इतनी बड़ी गिरावट का सामना क्यों कर रहा है। उन्होंने कहा, ”लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा, क्योंकि हमने ‘अमेरिका को फिर से महान बनाया है’ (और बहुत जल्द, यह पहले से कहीं ज़्यादा महान होगा!”
श्री ट्रंप ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने अमेरिका को बेवजह ”लूटा” है, जो अब एक हथियारबंद और अन्यायपूर्ण राजनीतिक संगठन से ज़्यादा कुछ नहीं रह गया है। दुख की बात यह है कि वे और भी बुरे होते जाएँगे। उच्चतम न्यायालय को ‘पूरी तरह से अयोग्य और शर्मनाक बताते हुए उन्होंने कहा कि इसे जिस मकसद से बनाया गया था, यह वह काम नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा, ”वे हमारे देश को नुकसान पहुँचा रहे हैं, और ऐसा करते रहेंगे। राष्ट्रपति के तौर पर मैं बस इतना ही कर सकता हूँ कि उनके बुरे बर्ताव के लिए उनकी आलोचना करूँ!” उल्लेखनीय है कि अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने 20 फरवरी को छह-तीन के बहुमत से एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था कि 1977 का अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियाँ अधिनियम (आईईईपीए) राष्ट्रपति को एकतरफा तौर पर बड़े पैमाने पर वैश्विक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है। कर तथा टैरिफ लगाने की शक्ति विशेष रूप से अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के पास है। अमेरिकी सरकार पर अब हजारों प्रभावित व्यवसायों और आयातकों को पैसा वापस करने की वित्तीय ज़िम्मेदारी आ गयी है। वापस की जाने वाली कुल अनुमानित राशि लगभग 166 अरब अमेरिकी डॉलर से 175 अरब अमेरिकी लॉडर के बीच है। अमेरिका की सर्वोच्च अदालत के न्यायाधीश ने फैसला सुनाया कि सरकार को मूल वापसी राशि के अलावा उस पर ब्याज भी देना होगा।

