केरल बिना बीमा वाले परिवारों का भी करेगा मुफ्त इलाज

तिरुवनंतपुरम, 16 मार्च (वार्ता) केरल सरकार ने राज्य में सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा लागू करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, जिससे उन लोगों को भी चिकित्सा सुरक्षा मिलना सुनिश्चित होगा, जो मौजूदा बीमा योजनाओं के दायरे में नहीं आते हैं।

स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने कहा है कि इस नयी पहल का उद्देश्य उन ‘छूटे मध्यम वर्ग’ के परिवारों तक स्वास्थ्य लाभ पहुंचाना है, जो कारुण्य आरोग्य सुरक्षा पद्धति (केएएसपी), कारुण्य बेनेवोलेंट फंड (केबीएफ), मेडिसेप और अन्य बीमा कार्यक्रमों के अंतर्गत कवर नहीं हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के निर्देशों के आधार पर विभिन्न स्तरों पर एक साल तक चली चर्चाओं और आकलनों के बाद यह निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव पर राज्य की ‘विजन 2031’ समीक्षा बैठकों के दौरान भी चर्चा की गयी थी, जिसके बाद सरकार ने सभी के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की योजना को मंजूरी दी। मौजूदा केएएसपी योजना के तहत कार्यक्रम में नामांकित परिवारों को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का चिकित्सा कवरेज मिलता है। वर्तमान में, राज्य के लगभग 42 लाख परिवारों के पास केएएसपी कार्ड हैं। इसके अलावा जो परिवार केएएसपी के दायरे में नहीं हैं, लेकिन जिनकी वार्षिक आय 3 लाख रुपये से कम है, उन्हें कारुण्य बेनेवोलेंट फंड के माध्यम से दो लाख रुपये तक की उपचार सहायता मिलती है। यह योजना किडनी से संबंधित बीमारियों के लिए 1 लाख रुपये तक की अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी प्रदान करती है।

सुश्री जार्ज ने कहा कि सरकार ने नयी सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना को लागू करने के लिए आगे के कदम उठाने की जिम्मेदारी राज्य स्वास्थ्य एजेंसी को सौंपी है। उन्हाेंने उम्मीद जतायी कि नयी पहल से उन लाखों परिवारों को राहत मिलेगी, जो वर्तमान में किसी भी चिकित्सा बीमा योजना में नामांकित नहीं हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित होगी।

उन्होंने कहा कि केरल देश में सबसे उच्च स्तर का मुफ्त चिकित्सा उपचार प्रदान करता है, जहां राज्य ने पिछले पांच वर्षों में 8,425 करोड़ रुपये का मुफ्त स्वास्थ्य उपचार मुहैया कराया है।

 

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