नई दिल्ली | भारतीय वायदा बाजार (MCX) में सोमवार को कारोबार की शुरुआत होते ही कीमती धातुओं की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 1,800 रुपये (1.14%) फिसलकर 1,56,655 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं, चांदी की कीमतों में और भी बड़ी गिरावट देखी गई, जहां मई डिलीवरी वाली चांदी 4,300 रुपये (1.7%) की गोता लगाकर 2,55,101 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम होने और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने बिकवाली पर जोर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की चमक फीकी पड़ती दिख रही है। मध्य पूर्व में जारी युद्ध तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जिससे तेल आपूर्ति के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। सिंगापुर के बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.7% गिरकर 4,986.34 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जो कि 5,000 डॉलर के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे है। अमेरिका द्वारा ईरान के तेल केंद्रों पर हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने महंगाई का खतरा बढ़ा दिया है, जिससे सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों पर दबाव बढ़ गया है।
भविष्य में सोने-चांदी की कीमतों का रुझान फिलहाल मिश्रित नजर आ रहा है। एक तरफ ऊंची ब्याज दरें और उधार लेने की बढ़ती लागत कीमती धातुओं पर दबाव बना रही हैं, तो दूसरी तरफ ‘स्टैगफ्लेशन’ (ऊंची महंगाई और धीमी विकास दर) की आशंका निवेशकों को लंबी अवधि के लिए सोने की ओर आकर्षित कर सकती है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार दूसरे सप्ताह सोने में गिरावट का सिलसिला जारी है। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले कदम और ईरान-अमेरिका संघर्ष के राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी है, जो बाजार की अगली दिशा तय करेंगे।

