चित्तौड़गढ़, 15 मार्च (वार्ता) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि जातिवाद की राजनीति देश की नींव को कमजोर कर रही है और बांटने की राजनीति हम सबको फिर से गुलामी की ओर धकेल रही है।
श्री योगी रविवार को यहां जौहर स्मृति संस्थान के तत्वावधान में आयोजित जौहर श्रद्धांजलि समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह देश कमजोर इसलिए हुआ क्योंकि जातिवाद ने समाज की नींव को दरका दिया, कमजोर कर दिया। यह जातिवाद की राजनीति भारत की नींव को कमजोर कर रही है। बांटने की राजनीति हम सबको फिर से गुलामी की ओर धकेल रही है।
उन्होंने आह्वान करते हुए कहा कि इस समस्या से बचने के लिए हम सबको एक साथ आगे बढ़ना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जिनको कुछ नहीं करना है, वे जातिवाद के आधार पर सामाजिक एकता को छिन्न-भिन्न करने का पाप कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चित्तौड़गढ़ का दुर्ग केवल पत्थरों से निर्मित कोई ऐतिहासिक ढांचा नहीं है, बल्कि यह देश के स्वाभिमान, मर्यादा और राष्ट्रीय अस्मिता का प्रहरी है। महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी और गुरु गोविंद सिंह जैसे राष्ट्रनायकों ने सत्ता के लिए नहीं, बल्कि देश और धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष किया था।
उन्होंने मेवाड़ और उत्तर प्रदेश के गहराते आध्यात्मिक संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि अब उत्तर प्रदेश में जो परिवर्तन दिख रहा है, उसके पीछे राजस्थान की इस वीर भूमि का योगदान है। मेरे पूज्य दादा गुरु इसी भूमि से गोरखपुर गए थे। उत्तर प्रदेश में अगर हम कुछ कर पा रहे हैं तो वह इसी चित्तौड़गढ़ का तेज है।
जौहर की गाथाओं का उल्लेख करते हुए श्री योगी ने कहा कि महारानी पद्मिनी का जौहर केवल प्राणों का त्याग नहीं, बल्कि विधर्मियों के विरुद्ध नारी गरिमा की रक्षा का सबसे बड़ा संकल्प था। उन्होंने उत्तरप्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि हमने स्पष्ट किया है कि नारी गरिमा के मामले में सरकार शून्य सहिष्णुता पर काम करेगी। किसी ने बहन-बेटी की सुरक्षा पर हाथ डालने का दुस्साहस किया तो अगले चौराहे पर यमराज उसका इंतजार कर रहा होगा। उन्होंने कहा कि कौन ऐसा भारतीय होगा, जो नेताजी सुभाष चंद्र बोस का स्मरण न करता हो। नेताजी सुभाष चंद्र बोस होते तो भारत का विभाजन नहीं होता, पाकिस्तान भी नहीं होता।
समारोह में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि महाराणा बप्पा रावल से लेकर महाराणा राज सिंह तक का बलिदान किसी एक जाति विशेष के लिए नहीं बल्कि पूरे हिंदू धर्म और सभ्यता की रक्षा के लिए था। श्री शेखावत ने कहा कि चित्तौड़गढ़ का दुर्ग केवल पत्थरों से निर्मित कोई ढांचा नहीं, बल्कि यह भारत के स्वाभिमान, अस्मिता और अदम्य जिजीविषा का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने समाज को एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि ‘बटेंगे तो कटेंगे’ का नारा वर्तमान परिस्थितियों में सांस्कृतिक पुनरुद्धार के लिए सबसे बड़ी सीख है।
श्री शेखावत ने योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने पिछले वर्ष का अपना वायदा निभाया और निमंत्रण देने की औपचारिकता के बिना ही इस पवित्र मिट्टी को मस्तक पर लगाने यहां पधारे। शेखावत ने 1982 के अपने छात्र जीवन को याद करते हुए बताया कि वे यहां तब से इस आयोजन के साक्षी रहे हैं जब वे एक छोटे से विद्यार्थी थे।
श्री शेखावत ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग की सुरक्षा और पर्यटन को लेकर महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दुर्ग की मर्यादा और यूनेस्को की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए यहां एक अत्याधुनिक ‘एक्सपीरियंस सेंटर’ विकसित किया जाएगा, जहां आने वाला हर पर्यटक भारत की श्रेष्ठ परंपराओं और बलिदान के इतिहास को महसूस कर सकेगा। भक्ति की शक्ति मां मीराबाई की स्मृति में भी एक भव्य एक्सपीरियंस सेंटर बनाया जाएगा, जिसके लिए भूमि आवंटित की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि दुर्ग पर ट्रैफिक की भारी समस्या और नवरात्रि के दौरान होने वाले जाम को देखते हुए, सूरजपोल की तरफ से एक नया वैकल्पिक रास्ता बनाने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इससे दुर्ग पर ‘वन-वे’ ट्रैफिक की व्यवस्था सुचारू हो सकेगी।
