कोलकाता, 15 मार्च (वार्ता) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव तारीख के ऐलान से पहले रविवार को सभी सरकारी कर्मचारियों के लंबे समय से रुके हुए महंगाई भत्ते (डीए) के बकाया का भुगतान मार्च 2026 से शुरू करने की घोषणा की।
यह ऐलान चुनाव आयोग के दिल्ली के विज्ञान भवन में शाम चार बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पश्चिम बंगाल और चार दूसरे राज्यों के लिए चुनाव कार्यक्रम बताने से ठीक पहले हुआ। सुश्री बनर्जी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के ज़रिए यह ऐलान किया, जिसमें कहा गया कि राज्य की ”मा-माटी-मानुष” सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनर्स से किया अपना वादा पूरा किया है।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स, शिक्षकों, पंचायत , नगर निकाय और दूसरी स्थानीय निकायों के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मार्च 2026 से वेतन और भत्ते का पुनरीक्षण) नियम, 2009 (आरओपीए 2009) के तहत बकाया मिलना शुरु जाएगा। उन्होंने कहा कि भुगतान के तरीके और कार्यक्रम की जानकारी राज्य वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में दी गई है।
गौरतलब है कि डीए का मुद्दा कई सालों से राज्य सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच झगड़े का एक बड़ा मसला बना हुआ है। कर्मचारियों द्वारा केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर डीए की मांग करने और 2009 के वेतन संशोधन ढांचे के तहत एरियर के भुगतान की मांग करने के बाद यह मामला अदालत में पहुंचा। उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकार को बकाया डीए का कम से कम 25 प्रतिशत तुरंत चुकाने का निर्देश दिया था।
विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने इस कदम की आलोचना की और इसे चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से ठीक पहले किया गया एक ”मज़ाक” कहा। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि सरकार को चुनाव की घोषणा से कुछ मिनट पहले ही लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों की याद आई और इस फैसले को एक हताश राजनीतिक रणनीति बताया।
वाम झुकाव वाले गुट से जुड़े नेताओं ने दावा किया कि लगातार विरोध प्रदर्शनों ने सरकार को मजबूर कर दिया है। उनके मुताबिक, 13 मार्च को पूरे राज्य में काम बंद करने से प्रशासन पर दबाव बढ़ गया था। दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस के समर्थन वाले राज्य सरकार के कर्मचारी संघ ने इस फैसले का स्वागत किया।
