ग्वालियर:ग्वालियर नगर निगम सीमा के अंतर्गत आने वाले ग्राम बरा की 198 बीघा बेशकीमती जमीन के मालिकाना हक की कानूनी लड़ाई अब एक नए पड़ाव पर पहुँच गई है। उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने गुप्तेश्वर गृह निर्माण सहकारी संस्था के पक्ष में पूर्व में आए फैसले के अमल पर अंतरिम रोक लगा दी है। शासन की पुनर्विचार याचिका पर आए इस आदेश ने फिलहाल उस भूमि को सुरक्षित कर दिया है जिसे वन विभाग अपनी आरक्षित संपत्ति (कंपार्टमेंट नंबर 320) बता रहा है।
बाजार दर और सरकारी रिकॉर्ड का पेच
ग्राम बरा की भौगोलिक स्थिति और शहर से इसकी निकटता के कारण इस 198 बीघा जमीन की कीमत अरबों रुपये आंकी जा रही है।सरकारी अभिलेखों और पुराने राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार यह भूमि ‘जंगल और पहाड़’ के रूप में दर्ज है। गुप्तेश्वर सोसायटी का पक्ष 1964 की उन रजिस्ट्रियों पर टिका है, जिन्हें पूर्व में ट्रायल कोर्ट ने संदेहास्पद माना था। शासकीय अधिवक्ता सीपी सिंह ने मजबूती से पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि पिछले आदेश के दौरान कुछ ऐसे अनिवार्य साक्ष्यों और प्रक्रियागत तथ्यों की अनदेखी हुई थी, जो इस जमीन के शासकीय स्वरूप को सिद्ध करते हैं। कोर्ट ने इन दलीलों को विचारणीय मानते हुए दस्तावेजों की पुनः समीक्षा करने का निर्णय लिया है।
