जन्मजात हृदय ब्लॉक से पीड़ित 17 वर्षीय युवती की पेसमेकर प्रत्यारोपण द्वारा जान बचाई गई

रीवा:रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में जन्मजात पूर्ण हृदय ब्लॉक (Congenital Complete Heart Block) से गंभीर रूप से पीड़ित मऊगंज शहर की 17 वर्षीय युवती को बेहोशी और कार्डियक अरेस्ट के साथ डॉ. एस.के. त्रिपाठी जी के पास लाया गया था।डॉ. एस.के. त्रिपाठी (डी.एम. कार्डियोलॉजी) तथा उनकी कुशल टीम ने तत्काल कार्डियक कैथ लैब में पेसमेकर (Pacemaker) प्रत्यारोपण की जटिल प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की, जिससे मरीज की जान बचाई गई। यह प्रक्रिया मरीज के जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुई।

कैथ लैब टीम में जय नारायण मिश्रा, सत्यम, सुमन, मनीष, सुधांशु, निकित, सोनाली, विजय शामिल रहे। नर्सिंग स्टाफ में सतेन्द्र एवं किशोर ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
यह सुपर स्पेशलिटी स्तर की उपलब्धि उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ला की दूरगामी सोच एवं कुशल नेतृत्व का परिणाम है, जिसके कारण रीवा में ऐसी उन्नत हृदय चिकित्सा संभव हो पाई है।
प्रक्रिया की सफलता पर संस्थान के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल एवं सुपरिंटेंडेंट डॉ. अक्षय श्रीवास्तव ने पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
डॉ. एस.के. त्रिपाठी एवं उनकी टीम द्वारा निरंतर ऐसी जटिल प्रक्रियाओं के माध्यम से मरीजों के जीवन में नई उम्मीद जगाई जा रही है।

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