वॉशिंगटन | अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 के तहत भारत और चीन सहित 15 देशों के खिलाफ एक व्यापक जांच शुरू करने की घोषणा की है। यह कदम अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले शुल्कों को रद्द किए जाने के बाद उठाया गया है। ट्रंप प्रशासन का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या इन देशों की व्यापार नीतियां अमेरिकी उद्योगों पर अनुचित दबाव डाल रही हैं। फिलहाल लागू 10% का अस्थायी टैरिफ 150 दिनों तक प्रभावी रहेगा, जबकि नई दरों पर अंतिम निर्णय 5 मई के बाद सार्वजनिक सुनवाई के आधार पर लिया जाएगा।
इस जांच का सबसे बड़ा असर भारत के सौर मॉड्यूल, इस्पात, वस्त्र और स्वास्थ्य उत्पादों के निर्यात पर पड़ सकता है। अमेरिकी प्रशासन को संदेह है कि भारत की विनिर्माण क्षमता घरेलू मांग से कहीं अधिक हो चुकी है, जिससे निर्यात अधिशेष (Export Surplus) बढ़ रहा है। जांच के मुख्य बिंदुओं में सरकारी सब्सिडी, मजदूरी का दबाव और कमजोर पर्यावरण मानक शामिल हैं। यदि अमेरिका इन प्रथाओं को अनुचित पाता है, तो भारतीय सौर मॉड्यूल और ऑटोमोबाइल पार्ट्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर भारी अतिरिक्त टैरिफ थोपा जा सकता है, जो द्विपक्षीय व्यापार के लिए बड़ा झटका होगा।
जांच के दायरे में यूरोपीय संघ के 27 देशों के अलावा वियतनाम, ताइवान, मेक्सिको और जापान जैसे बड़े व्यापारिक साझेदार भी शामिल हैं। अमेरिका का तर्क है कि इन देशों से आने वाला सस्ता माल अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र को नुकसान पहुँचा रहा है। विशेष रूप से सेमीकंडक्टर, बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को इस जांच में प्राथमिकता दी गई है। 15 अप्रैल तक सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी गई हैं, जिसके बाद यह तय होगा कि वैश्विक बाजार में अमेरिकी व्यापारिक दीवारें कितनी ऊंची होंगी। इस फैसले से पूरी दुनिया में व्यापार युद्ध (Trade War) छिड़ने की आशंका बढ़ गई है।

