नई दिल्ली | ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध का असर अब आम आदमी की प्यास पर पड़ने लगा है। वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें प्रति बैरल 100 डॉलर के पार पहुँचने से पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर इंडस्ट्री संकट में है। दरअसल, प्लास्टिक बोतल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले पॉलिमर की कीमतें 50% तक बढ़ गई हैं, जिससे 170 रुपये प्रति किलो का भाव मिल रहा है। इसके साथ ही बोतलों के ढक्कन, लेबल और कार्डबोर्ड बॉक्स की लागत भी दोगुनी हो गई है। गर्मियों का सीजन शुरू होने से ठीक पहले उत्पादन लागत में हुई इस भारी बढ़ोतरी ने निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है।
लागत के बढ़ते बोझ के कारण देश के लगभग 2,000 छोटे बोतलबंद पानी निर्माताओं ने वितरकों के लिए प्रति बोतल 1 रुपये (करीब 5%) की बढ़ोतरी कर दी है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो यह वृद्धि जल्द ही 10% तक पहुँच सकती है। प्रीमियम मिनरल वाटर बाजार में भी हलचल तेज है; ‘आवा’ जैसे ब्रांड्स ने रिसेलर्स के लिए कीमतों में 18% तक का इजाफा किया है। हालांकि बड़ी कंपनियां जैसे बिस्लेरी और किनले अभी भी अतिरिक्त लागत का भार खुद उठा रही हैं, लेकिन छोटे प्लेयर्स के लिए बाजार में टिके रहना मुश्किल होता जा रहा है।
भारत का बोतलबंद पानी का बाजार लगभग 5 अरब डॉलर का है, जो गर्मियों में अपने चरम पर होता है। आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बाधित होने से न केवल प्लास्टिक महंगा हुआ है, बल्कि परिवहन खर्च भी बढ़ गया है। वर्तमान में उपभोक्ता एक लीटर की बोतल के लिए औसतन 20 रुपये चुकाते हैं, लेकिन उद्योग संगठन का कहना है कि आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों में भी बदलाव देखा जा सकता है। पेय उद्योग के लिए यह स्थिति एक बड़ी चुनौती बन गई है, क्योंकि उन्हें एक तरफ बढ़ती लागत और दूसरी तरफ ग्राहकों की जेब का ख्याल रखना पड़ रहा है।

