महिला की करोड़ों की संपत्ति हड़पी, थाने की चौखट से शुरू हुआ ठगी का खेल

जबलपुर: प्रॉपर्टी विवाद के बाद न्याय की उम्मीद में थाने पहुंची एक महिला को पुलिस की चौखट पर ही भू माफियाओं ने मदद के नाम पर ठगी का शिकार बना लिया गया। जालसाजों ने षडयंत्र रच महिला की भूमि को धोखे से मुख्तारनामा कराकर फर्जीवाड़े के जरिए ठिकाने लगा दिया। इतना ही नहीं 34 लाख रूपए का लोन भी उठा लिया। मामले में आधा दर्जन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।सूत्रों के मुताबिक सरोज देवी गुप्ता पति संतोष कुमार गुप्ता निवासी शारदा नगर, करमेता की कुल रकवा 1960 वर्गफुट भूमि है जिस पर मकान एवं दुकान का निर्माण है दुकान उसके रिश्तेदार आशीष गुप्ता व उसके भाई चला रहे है, दुकान में एक गोदाम भी है।

सरोज देवी का ननद विमला गुप्ता उसके पुत्र आशीष गुप्ता व भाई विकास गुप्ता से संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। आधारताल तहसील के खसरा नंबर 457/28/1 पर स्थित अपनी 19 भाग की भूमि और मकान को बचाने के लिए वह माढ़ोताल थाने पहुंची थीं। यहीं से आरोपियों अखिलेश तिवारी और सुमित तिवारी की एंट्री हुई थी। शुरुआत में अखिलेश और सुमित तिवारी ने महिला के पक्ष में खड़े होकर उसके भांजे को भी धमकाया, जिससे सरोज देवी को विश्वास हो गया कि ये लोग उनके हमदर्द हैं। आरोपियों ने महिला को झांसा दिया कि वे न केवल पारिवारिक विवाद सुलझा देंगे, बल्कि कोर्ट-कचहरी के झंझटों से भी मुक्ति दिलाएंगे। भरोसे का फायदा उठाते हुए सोमेश तिवारी ने 73 लाख रुपये का इकरारनामा तैयार करवाया। आरोपियों ने महिला का बैंक खाता खुलवाया था और खुद के पास रखे स्वयं के चेक के जरिए पैसे भी ठिकाने लगा दिए। महिला को अंधेरे में रखकर, उसी फर्जी मुख्तारनामे के दम पर आरोपियों ने करोड़ों की संपत्ति अब्दुल गफूर नामक व्यक्ति के नाम रजिस्ट्री कर दी।
प्रधान आरक्षक ने मिलवाया, दस्तावेज दिलवाये, 15 हजार लिए
सूत्रों के मुताबिक जब पीडि़त महिला फरियाद लेकर माढ़ोताल थाने पहुंची थी तो वहांं जांचकर्ता प्रधान आरक्षक पिंकी रजक से मुलाकात हुई थी। जिन्होंने थाना प्रभारी के आदेश पर शिकायत पर प्रतिबंधात्मक कार्यवाही की थी। मामला न्यायालय पेश किया गया । इसी दौरान अधिवक्ता अखिलेश तिवारी एवं सोमेश तिवारी दोनों सरोज देवी गुप्ता से मिले थे। पीडि़ता का आरोप है कि प्रधान आरक्षक ने ही उन्हें संपत्ति विवाद निपटाने के लिये अधिवक्ता अखिलेष तिवारी व सोमेश तिवारी से मिलवाया था और थाने की कार्यवाही निपटाने के लिये 15 हजार रुपये लिये थे। इसके अलावा पिंकी ने अखिलेष तिवारी को संपत्ति के संबंध में सारे दस्तावेज दिलवाये थे।
ऐसे किसा फर्जीवाड़ा
शिकायतकर्ता सरोज देवी गुप्ता को झांसे मेें लेकर अखिलेश तिवारी व सोमेश तिवारी कार में बैठकर रजिस्ट्री कार्यालय धनवंतनगर अंधुवा जबलपुर 2 ले गये गए थे जहां वहां पर महेशदत्त राय मिला वहां पर सरोज देवी गुप्ता से अधिवक्ता अखिलेश तिवारी सोमेश तिवारी द्वारा एक पत्र में हस्ताक्षर कराये गए। जबरदस्ती रजिस्टार के सामने ले गये थे। अखिलेश तिवारी, सोमेश तिवारी महेशदत्त राय व दो अन्य व्यक्ति ममुख्तियार आम गवाह राजेशकुमार चौरसिया, नीरज कछवाहा) उपस्थित थे। मुख्तियार आम महेशदत राय के नाम से निष्पादित कराया गया इसके पश्चात उक्त प्रपर्टी को कम दमों में अब्दुल गफूर निवासी आधारताल के नाम से विक्रय पत्र का निष्पादन कराया गया।

इसी विक्रय पत्र के आधार पर बैंक ऑफ बडौदा मुख्य शाखा जबलपुर से 32 लाख रुपये का आवास ऋण अब्दुल गफुर के नाम से लिया गया है। सोमेश तिवारी, महेशदत्त राय द्वारा चेक में दस्ताख्त कराकर बैंक में प्रस्तुत किये गये था। म.प्र.ल ग्रामीण बैंक जबलपुर से आहरण राशि 34 लाख रुपय में से एक रुपये की भी राशि पीडि़ता को नहीं मिली। पीडि़ता की शिकायत पर माढ़ोताल पुलिस ने महेश दत्त राय, सोमेश तिवारी, अखिलेश तिवारी, सुमित तिवारी, राजेश कुमार चौरसिया, नीरज, अब्दुल गफुर के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, साजिश रचने के तहत मामला दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू कर दी है

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