बेजुबान रक्षक का अस्तित्व संकट: नाखूनों जैसे शल्कों के लिए मिटाया जा रहा है जंगल का रक्षक

सिवनी: कल्पना कीजिए एक ऐसा जीव जो रात के अंधेरे में चुपके-चुपके लाखों चींटियां और दीमक खाकर फसलों को बचा रहा हो, मिट्टी को हवा दे रहा हो और जंगल के संतुलन को बनाए रख रहा हो।एक ऐसे जीव की, जो न तो किसी पर हमला करता है, न ही जिसके दांत होते हैं। खतरा महसूस होने पर जो बस एक फुटबॉल की तरह खुद को समेट लेता है। हम बात कर रहे हैं भारतीय पैंगोलिन (Indian Pangolin) की—एक ऐसा जीव जो आज अपनी इसी मासूमियत और इंसानी लालच के कारण अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। यह जीव आज दुनिया का सबसे ज्यादा तस्करी किया जाने वाला स्तनपायी बन चुका है।

पैंगोलिन की सबसे बड़ी विशेषता उसके शरीर पर बने कठोर कवच (Scales) हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में फैली एक गलतफहमी ने इस जीव को मौत के घाट उतार दिया है। तस्करों का दावा है कि इसके शल्क से चमत्कारिक दवाइयां बनती हैं।सच्चाई क्या है? विज्ञान कहता है कि पैंगोलिन के शल्क ‘केराटिन’ (Keratin) से बने होते हैं। यह वही पदार्थ है जिससे हमारे नाखून और बाल बनते हैं। क्या आप अपने नाखून चबाकर कैंसर या गठिया ठीक कर सकते हैं? जवाब है—नहीं।

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